Saturday , September 19 2026

गुरु पर्व 2025: सिर्फ त्योहार नहीं, दिलों को जोड़ने का सबसे बड़ा उत्सव, जानिए तारीख और लंगर का सच्चा मतलब

गुरुद्वारों से आती गुरबानी की मीठी आवाज़,सेवा करते लोगों के चेहरे पर सुकून,और एक साथ पंगत में बैठकर लंगर चखने का अनुभव… यही है गुरु नानक जयंती,जिसे हम सब प्यार से गुरु पर्व भी कहते हैं। यह सिख धर्म के सबसे बड़े और सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है,जिसे सिख धर्म के संस्थापक,गुरु नानक देव जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।यह दिन सिर्फ़ जश्न का नहीं,बल्कि सेवा,भक्ति और इंसानियत के सबसे बड़े पाठ को याद करने का है।कब है गुरु नानक जयंती2025?इस साल,गुरु नानक देव जी की556वीं जयंती5नवंबर2025,बुधवारको मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार,यह तारीख हर साल कार्तिक महीने की पूर्णिमा को आती है।शुभ समय:पूर्णिमा तिथि4नवंबर की रात10:36बजे से शुरू होकर5नवंबर की शाम6:48बजे तक रहेगी। यह पूरा समय पूजा,पाठ और सेवा के लिए बेहद शुभ माना जाता है।कैसे मनाया जाता है गुरु पर्व?गुरु पर्व का उत्सव दो-तीन दिन पहले से ही शुरू हो जाता है।गुरुद्वारों में48घंटे तकअखंड पाठचलता है,जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब का बिना रुके पाठ किया जाता है।शहरों में भव्यनगर कीर्तननिकाले जाते हैं,जिसमें लोग भजन-कीर्तन करते हुए गुरु जी के संदेशों को बांटते हैं।सुबह-सुबहप्रभात फेरियांनिकालकर दिन की शुरुआत गुरु की याद में की जाती है।लेकिन गुरु पर्व की आत्मा बसती है’लंगर’मेंकभी सोचा है,इस परंपरा की शुरुआत क्यों और कैसे हुई?बात1500के दशक की है,जब समाज जाति और धर्म के नाम पर बुरी तरह बंटा हुआ था। कोई ऊँचा था,कोई नीचा। तब गुरु नानक देव जी ने इस भेदभाव की दीवार को तोड़ने के लिएलंगरकी शुरुआत की।लंगर का मतलब सिर्फ़ मुफ़्त भोजन नहीं है,इसका असली मतलब हैसमानता। यह एक ऐसी जगह है जहाँ कोई राजा नहीं,कोई गरीब नहीं। कोई हिंदू नहीं,कोई मुसलमान नहीं। हर कोई,चाहे किसी भी धर्म,जाति या अमीरी-गरीबी से हो,एक साथ एक ही पंगत में ज़मीन पर बैठकर प्रसाद के रूप में भोजन करता है।यह परंपरा आज भी दुनिया भर के गुरुद्वारों में निभाई जा रही है और हमें याद दिलाती है कि हम सब एक ही ईश्वर की संतान हैं और इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।