News India Live, Digital Desk: दिल्ली और पंजाब में सरकार चलाने के बाद, अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) अब समंदर किनारे बसे खूबसूरत राज्य गोवा में अपनी जड़ें ज़माने के लिए पूरी तरह तैयार है। राजनीति में कहा जाता है कि अगर आपको किसी राज्य को समझना है, तो उसके गावों तक पहुँचना ज़रूरी है। शायद यही वजह है कि ‘आप’ ने अब गोवा के जिला पंचायत चुनावों (Zilla Panchayat Elections) में पूरी ताकत झोंकने का फैसला किया है।
ताजा ख़बरों के मुताबिक़, पार्टी ने एक बड़ा दांव खेलते हुए ऐलान किया है कि वो गोवा की सभी 50 जिला पंचायत सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। जी हाँ, किसी गठबंधन के बिना, अकेले अपने दम पर!
पहली लिस्ट जारी: 22 सिपाही मैदान में
इंतज़ार की घड़ियों को ख़त्म करते हुए, पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट (First List) भी जारी कर दी है। इसमें 22 नामों का ऐलान किया गया है। गोवा में पार्टी के संयोजक अमित पालेकर ने मीडिया से बात करते हुए साफ किया कि उनकी तैयारी पूरी है और वे जनता के बीच एक मजबूत विकल्प बनकर उभरेंगे।
आम आदमी को मौका?
‘आप’ की हमेशा से ये यूएसपी (USP) रही है कि वो नेताओं के बजाय आम नागरिकों को टिकट देती है। गोवा में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। बताया जा रहा है कि जिन 22 लोगों के नाम फाइनल हुए हैं, उनमें पढ़े-लिखे युवा, समाज सेवी और बेदाग छवि वाले लोग शामिल हैं। पार्टी का कहना है कि वे भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का वादा लेकर जनता के बीच जाएंगे।
बीजेपी और कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी?
अब तक गोवा की राजनीति मुख्य रूप से बीजेपी और कांग्रेस के इर्द-गिर्द घूमती थी। लेकिन पंचायत स्तर पर AAP की यह आक्रामक एंट्री समीकरण बिगाड़ सकती है।
- ग्रास-रूट लेवल (Grassroot Level): अगर AAP जिला पंचायत में कुछ सीटें भी जीत लेती है, तो यह उनके लिए विधानसभा चुनाव की नींव रखने जैसा होगा।
- वोट कटने का डर: लोकल चुनावों में हर एक वोट मायने रखता है। ऐसे में ‘आप’ का चुनाव लड़ना बड़ी पार्टियों का खेल खराब कर सकता है।
आगे क्या?
राजनीति के जानकारों का मानना है कि गोवा का वोटर समझदार है और वह बदलाव को मौका देता रहा है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली वाला ‘मोहल्ला क्लिनिक और स्कूल’ का मॉडल गोवा के नारियल के पेड़ों के बीच कितनी जगह बना पाता है। फिलहाल तो सियासी गलियारों में इस ‘झाड़ू’ वाली खबर की खूब चर्चा है।
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