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जब अमेरिका ने समंदर में उड़ाई ड्रग्स से भरी पनडुब्बी, ट्रंप बोले- ये मेरा सम्मान था:

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News India Live, Digital Desk: Narco-Submarine :  ये कहानी किसी एक्शन फिल्म जैसी लगती है: एक पनडुब्बी, जो लगभग पानी के नीचे छिपी हुई है, चुपचाप कैरेबियन सागर से अमेरिका की तरफ बढ़ रही है। उसके अंदर भारी मात्रा में ड्रग्स भरी है। और फिर अमेरिकी सेना उसे ढूंढकर तबाह कर देती है। लेकिन यह कोई फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि हकीकत है।

अमेरिका ने ड्रग्स तस्करों के खिलाफ अपनी लड़ाई को एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है। हाल ही में, अमेरिकी सेना ने कैरेबियन सागर में ड्रग्स ले जा रही एक संदिग्ध पनडुब्बी को नष्ट कर दिया। इस हमले की पुष्टि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर की।

ट्रंप ने बड़े ही नाटकीय अंदाज में लिखा, “एक बहुत बड़ी ड्रग्स ले जाने वाली पनडुब्बी को नष्ट करना मेरा बहुत बड़ा सम्मान था।” उन्होंने दावा किया कि खुफिया जानकारी के अनुसार, यह पनडुब्बी “ज्यादातर फेंटानिल और दूसरे नशीले पदार्थों से भरी हुई थी।”

यह हमला गुरुवार, 16 अक्टूबर को हुआ, जिसमें पनडुब्बी पर सवार चार लोगों में से दो की मौत हो गई। बाकी बचे दो लोगों को, जो इक्वाडोर और कोलंबिया के नागरिक थे, अमेरिकी सेना ने बचा लिया और मुकदमा चलाने के लिए उनके देशों को वापस भेज दिया।

ट्रंप ने इस जानलेवा कार्रवाई का बचाव करते हुए एक चौंकाने वाला दावा किया: “अगर मैं इस पनडुब्बी को किनारे आने देता तो कम से कम 25,000 अमेरिकी मारे जाते।”

क्या होती हैं ये ‘नार्को-पनडुब्बियां’?

ये सेना की असली पनडुब्बियों जैसी नहीं होतीं। ड्रग्स कार्टेल इन्हें जंगलों में खास तौर पर बनाते हैं। ये ऐसे जहाज होते हैं जिनका ज्यादातर हिस्सा पानी के नीचे रहता है, जिससे ये रडार या आसमान से आसानी से पकड़ में नहीं आते। इनका मकसद बस एक होता है – सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचकर हजारों किलोमीटर तक करोड़ों रुपये का नशीला पदार्थ पहुंचाना।

क्यों बदल गया है लड़ाई का तरीका?

यह हमला कोई पहली घटना नहीं है। सितंबर की शुरुआत से अब तक कैरेबियन सागर में इस तरह का यह छठा अमेरिकी सैन्य हमला है, जिसमें कम से कम 29 लोग मारे जा चुके हैं। यह ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में एक बहुत बड़े बदलाव का संकेत है। पहले जहां कोस्ट गार्ड ड्रग्स तस्करों को पकड़कर गिरफ्तार करते थे, वहीं अब सीधे तौर पर सेना घातक बल का प्रयोग कर रही है।

इस आक्रामक रणनीति की जड़ें ट्रंप प्रशासन के उस फैसले में हैं, जिसमें कुछ ड्रग्स कार्टेल को “आतंकवादी संगठन” घोषित कर उनके खिलाफ एक तरह का “युद्ध” छेड़ दिया गया था। इसी कानूनी ढांचे का हवाला देकर अब सेना इन ऑपरेशनों को अंजाम दे रही है।

हालांकि, इस तरीके पर कई कानूनी सवाल भी उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रग्स तस्करी एक गंभीर अपराध है, लेकिन इसे एक सैन्य हमले का कारण बताकर जानलेवा बल का प्रयोग करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हो सकता है।

लेकिन इन विवादों के बावजूद, व्हाइट हाउस का संदेश साफ है। जैसा कि ट्रंप ने कहा, “मेरे रहते हुए, अमेरिका नशीले पदार्थों के तस्करों को बर्दाश्त नहीं करेगा, चाहे वे जमीन से आएं या समुद्र से।” यह हमला ड्रग्स के खिलाफ दशकों से चली आ रही लड़ाई के एक नए, ज्यादा आक्रामक और खूनी दौर की शुरुआत है।

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