
जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition)के मामलों में अक्सर किसानों और भू-मालिकों को यह शिकायत रहती है कि उन्हें उनकी जमीन का सही दाम नहीं मिला। ऐसे ही लाखों किसानों को राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है,जो भविष्य के लिए एक नज़ीर बन सकता है।हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर किसी की जमीन सरकार अधिग्रहित करती है,तो उसे उस इलाके केसबसे ऊंचे बाजार मूल्य (Highest Market Value)के आधार पर ही मुआवजा मिलना चाहिए।क्या है पूरा मामला,जिससे आया यह बड़ा फैसला?यह मामला उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले का है। यहां नटवा गांव के रहने वाले रूप नारायण नाम के एक किसान की लगभग6बीघा जमीन को राज्य विद्युत बोर्ड ने सब-स्टेशन बनाने के लिए अधिग्रहित कर लिया था।1993में तय हुआ था मुआवजा:उस समय कलेक्टर ने₹26,624प्रति बीघाके हिसाब से मुआवजा तय किया था।किसान ने लड़ी लंबी लड़ाई:रूप नारायण का कहना था कि यह कीमत बहुत कम है और यह उनकी जमीन के असली बाजार भाव के आसपास भी नहीं है। उन्होंने इस फैसले को पहले मिर्जापुर की स्थानीय अदालत में चुनौती दी,लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली।हाईकोर्ट में दी गई दलील:इसके बाद,उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने कोर्ट के सामने उस इलाके में हाल ही में हुई अन्य जमीन की खरीद-बिक्री के दस्तावेज़ (Sale Deeds)पेश किए और कहा कि मुआवजा उन सौदों में तय हुई कीमत के आधार पर मिलना चाहिए।हाईकोर्ट ने कैसे दिया किसान के हक़ में फैसला?हाईकोर्ट ने रूप नारायण की दलील को सही माना। कोर्ट के सामने तीन अलग-अलग बिक्री के दस्तावेज़ रखे गए,जिनमें जमीन की कीमत₹34,125प्रति बिस्वातक थी।कोर्ट ने कहा कि अगर किसी इलाके में एक से ज़्यादा सौदे हुए हैं,तो भू-मालिक कोसबसे ज़्यादा कीमत वाले सौदेके आधार पर मुआवजा पाने का पूरा अधिकार है।हालांकि,सबसे ऊंची कीमत वाले सौदे में जमीन का टुकड़ा छोटा था,इसलिए कोर्ट ने कुछ कटौती करते हुए,किसान के लिए मुआवजे की नई दर₹17,062.50प्रति बिस्वातय कर दी। यह पुरानी दर (जो लगभग₹1,331प्रति बिस्वा थी) से12गुना से भी ज़्यादाहै।सिर्फ बढ़ा हुआ मुआवजा ही नहीं,ब्याज भी मिलेगाहाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि रूप नारायण को सिर्फ बढ़ा हुआ मुआवजा ही नहीं,बल्कि उस पर12%सालाना की दर से अतिरिक्त मुआवजा और ब्याजभी दिया जाएगा।यह फैसला उन सभी किसानों और भू-मालिकों के लिए एक बहुत बड़ी जीत है,जिनकी जमीनें विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाती हैं। अब वे अपनी जमीन का सबसे अच्छा दाम पाने के लिए इस फैसले को एक मिसाल के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।
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