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जेवर एयरपोर्ट का बदलेगा नाम! PM मोदी के नाम पर रखने का प्रस्ताव पास, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी

उत्तर प्रदेश की राजनीति और इंफ्रास्ट्रक्चर गलियारे से एक ऐतिहासिक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट' यानी जेवर एयरपोर्ट का नाम बदलने की तैयारी पूरी कर ली गई है। लखनऊ स्थित लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में जेवर एयरपोर्ट का नाम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने के औपचारिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। राज्य कैबिनेट द्वारा सर्वसम्मति से पारित इस प्रस्ताव को अब अंतिम मुहर और आधिकारिक गजट अधिसूचना के लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय और केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है। एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शुमार होने जा रहे जेवर एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर लंबे समय से राजनीतिक हलकों में चर्चाएं चल रही थीं, जिस पर अब उत्तर प्रदेश सरकार ने आधिकारिक रूप से अपनी सहमति जता दी है।

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: क्यों चुना गया यह नाम और क्या है प्रस्ताव

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय कैबिनेट बैठक में प्रदेश के समग्र औद्योगिक विकास, एविएशन हब के विस्तार और कनेक्टिविटी को लेकर कई अहम एजेंडों पर मुहर लगाई गई। इनमें सबसे प्रमुख एजेंडा जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के औपचारिक नामकरण का था। राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों और प्रवक्ता के अनुसार, भारत को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और विश्वस्तरीय एविएशन सेक्टर देने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की ऐतिहासिक भूमिका रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को वैश्विक पटल पर नई औद्योगिक पहचान दिलाने वाले जेवर एयरपोर्ट की परिकल्पना, भूमि अधिग्रहण से लेकर निर्माण की रिकॉर्ड प्रगति प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में ही संभव हो सकी है। इसी योगदान और कृतज्ञता के प्रतीक स्वरूप उत्तर प्रदेश सरकार ने इस ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम प्रधानमंत्री के नाम पर समर्पित करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद नागरिक उड्डयन विभाग ने संबंधित औपचारिक दस्तावेज केंद्र सरकार को प्रेषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

एशिया का सबसे बड़ा एविएशन हब: जेवर एयरपोर्ट की क्षमता और खासियत

गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) जिले के जेवर क्षेत्र में विकसित हो रहा यह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश का पहला नेट-जीरो एमिशन (कार्बन न्यूट्रल) एयरपोर्ट बनने जा रहा है। पूरी तरह तैयार होने के बाद यह छह रनवे के साथ एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा। परियोजना के पहले चरण में सालाना 1.2 करोड़ (12 मिलियन) यात्रियों को संभालने की क्षमता विकसित की जा रही है, जो आगामी चरणों के पूरा होने पर 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी। इस हवाई अड्डे के शुरू होने से न केवल दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर विमानों और यात्रियों का दबाव 30 से 40 प्रतिशत तक कम होगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों—नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, मेरठ, मथुरा और आगरा के लाखों यात्रियों को सीधे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों की सुविधा उनके घर के पास मिलेगी।

मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी से जुड़ा जेवर: मेट्रो, पॉड टैक्सी और हाई-स्पीड लिंक

जेवर एयरपोर्ट की सबसे अनूठी विशेषता इसकी आधुनिक मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी है। हवाई अड्डे को सीधे यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए डेडिकेटेड इंटरचेंज तैयार किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, एयरपोर्ट को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले लिंक रोड का काम भी युद्धस्तर पर चल रहा है। एयरपोर्ट परिसर को ग्रेटर नोएडा और दिल्ली मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने के लिए नमो भारत (RRTS) और रैपिड रेल का विस्तार प्रस्तावित है। घरेलू और विदेशी पर्यटकों व उद्योगपतियों की सुविधा के लिए एयरपोर्ट से फिल्म सिटी तक भारत की पहली पॉड टैक्सी (Personal Rapid Transit) चलाने का खाका भी तैयार किया गया है। कार्गो और लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर जेवर एयरपोर्ट भारत का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स गेटवे साबित होगा, जहां से उत्तर भारत का माल सीधे दुनिया भर के बाजारों में भेजा जा सकेगा।

राजनीतिक गलियारों में हलचल और उत्तर प्रदेश के विकास को नई रफ्तार

योगी कैबिनेट द्वारा जेवर एयरपोर्ट का नाम बदलने का प्रस्ताव पास किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी का दौर भी तेज हो गया है। सत्तापक्ष ने इसे प्रधानमंत्री के विजन और देश के आधुनिक नवनिर्माण के प्रति एक ऐतिहासिक सम्मान करार दिया है, वहीं विपक्षी दलों ने इस पर अपनी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी हैं। हालांकि, स्थानीय व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उद्योग जगत का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट के नामकरण और इसके जल्द वाणिज्यिक संचालन से यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) क्षेत्र में विदेशी निवेश की बाढ़ आएगी। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर्स, मेडिकल डिवाइस पार्क, टेक्सटाइल हब और फिल्म सिटी जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स से आने वाले वर्षों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लाखों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।