
News India Live, Digital Desk: अमेरिकी राजनीति के सबसे चर्चित चेहरे और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बयानों को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला उनके करीबी सहयोगी और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जेडी वेंस (JD Vance) की पाकिस्तान यात्रा से जुड़ा है। ट्रंप ने पहले एक बयान में जेडी वेंस को पाकिस्तान भेजने की बात कहकर सबको चौंका दिया, लेकिन कुछ ही देर बाद वह अपने इस दावे से पूरी तरह पलट गए। ट्रंप के इस यू-टर्न ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।आखिर क्या था ट्रंप का वह बयान?एक चुनावी सभा और मीडिया ब्रीफिंग के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि उन्होंने जेडी वेंस को किसी विशेष मिशन या कूटनीतिक संवाद के लिए पाकिस्तान भेजा है या भेजने की योजना बनाई है। पाकिस्तान जैसे संवेदनशील देश के संदर्भ में अमेरिका के इतने बड़े नेता का यह बयान तुरंत वायरल हो गया। जैसे ही यह खबर इस्लामाबाद से लेकर वॉशिंगटन तक पहुंची, कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई कि क्या ट्रंप प्रशासन पर्दे के पीछे पाकिस्तान के साथ कोई नई डील कर रहा है।अचानक पीछे हटे ट्रंप: क्या दबाव में बदला फैसला?जैसे ही ट्रंप के बयान पर सवाल उठने शुरू हुए और व्हाइट हाउस व अन्य एजेंसियों की ओर से इस पर स्पष्टीकरण की मांग होने लगी, ट्रंप की टीम की ओर से सफाई आ गई। ट्रंप ने अपने दावे पर सफाई देते हुए इसे एक तरह का ‘मिसकम्युनिकेशन’ या संदर्भ से हटकर कही गई बात करार दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडी वेंस जैसे महत्वपूर्ण नाम को पाकिस्तान के साथ जोड़ने से भारत और अमेरिका के संबंधों पर भी असर पड़ सकता था, शायद इसी कूटनीतिक दबाव के चलते ट्रंप को अपने शब्दों को वापस लेना पड़ा।जेडी वेंस और ट्रंप की जोड़ी पर उठ रहे सवालविपक्षी खेमे ने इस घटनाक्रम को लेकर ट्रंप पर निशाना साधा है। डेमोक्रेटिक नेताओं का कहना है कि ट्रंप विदेशी नीति जैसे गंभीर मुद्दों पर गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान के मीडिया में भी इस बात को लेकर काफी चर्चा रही कि क्या वास्तव में जेडी वेंस का कोई दौरा प्रस्तावित था या यह केवल ट्रंप का एक चुनावी स्टंट था। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण ने जेडी वेंस की वैश्विक भूमिका और ट्रंप के पाकिस्तान के प्रति नजरिए पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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