
पश्चिम एशिया (Middle East) में पिछले तीन महीनों से अधिक समय से जारी भीषण युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रही अंतरराष्ट्रीय शांति वार्ताओं के बीच एक बहुत बड़ा कूटनीतिक सस्पेंस पैदा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहां एक तरफ दावा किया है कि रविवार 14 जून 2026 को ही इस ऐतिहासिक शांति समझौते पर अंतिम मुहर लग जाएगी, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका के इस दावे पर तुरंत हरी झंडी देने से साफ इनकार कर दिया है। तेहरान का कहना है कि प्रस्तावित समझौते के मसौदे पर अभी उच्च स्तरीय समीक्षा चल रही है और अंतिम फैसले से पहले कोई भी जल्दबाजी नहीं की जाएगी। लाइव हिन्दुस्तान के तेहरान ब्यूरो प्रमुख देवेंद्र कश्यप की इस विशेष एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए कि आखिरी पलों में इस महा-डील के बीच कौन सा पेच फंस गया है।
कतर के टॉप नेगोशिएटर्स की तेहरान में इमरजेंसी एंट्री, बंद कमरों में मैराथन बैठकें जारी
राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर के वरिष्ठ वार्ताकारों (Negotiating Team) का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल रविवार सुबह आपातकालीन बैठक के लिए तेहरान पहुंच चुका है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स (Reuters) ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि कतरी टीम दोनों महाशक्तियों के बीच मतभेदों को पाटने और युद्धविराम के इस अंतिम मसौदे को अमलीजामा पहनाने के लिए बेहद तेज गति से काम कर रही है। हालांकि, अमेरिकी और पाकिस्तानी नेतृत्व ने भविष्यवाणी की थी कि रविवार को ही इस ऐतिहासिक फ्रेमवर्क पर दस्तखत हो जाएंगे, लेकिन ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने साफ किया है कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने अभी तक समझौता ज्ञापन पर अपनी अंतिम सहमति नहीं दी है।
ट्रंप बोले आज ही खुलेगा होर्मुज स्ट्रेट, ईरान के विदेश मंत्रालय ने समय-सीमा पर जताया बड़ा संदेह
वाशिंगटन से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद आक्रामक अंदाज में सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि ईरान के साथ शांति डील रविवार को ही फाइनल हो जाएगी और इसके तुरंत बाद रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह से खोल दिया जाएगा। ट्रंप के इस एकतरफा दावे पर पलटवार करते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय के मुख्य प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने तेहरान में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट किया कि समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर की कोई भी तारीख अभी तय नहीं हुई है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि यह ऐतिहासिक डील आज या कल में नहीं होने जा रही है, हालांकि आने वाले कुछ दिनों के भीतर दोनों पक्षों में सहमति बनने की संभावनाओं से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।
मशहद की सड़कों पर उतरे कट्टरपंथी, शीर्ष राजनयिक अब्बास अरघची के खिलाफ जमकर की नारेबाजी
इस अंतरराष्ट्रीय शांति समझौते को लेकर खुद ईरान के भीतर भी आंतरिक गृहयुद्ध और भारी राजनीतिक विरोध की स्थिति पैदा हो गई है। शनिवार को ईरान के उत्तर-पूर्वी पवित्र शहर मशहद में स्थित विदेश मंत्रालय के प्रांतीय कार्यालय के बाहर दर्जनों कट्टरपंथी प्रदर्शनकारियों ने एक उग्र प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन ईरान के शीर्ष राजनयिक अब्बास अरघची (Abbas Araghchi) के उस टेलीविजन इंटरव्यू के बाद भड़का, जिसमें उन्होंने अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता की तकनीकी शर्तों पर खुलकर चर्चा की थी। फार्स एजेंसी द्वारा जारी वीडियो फुटेज में पारंपरिक काली चादर पहने महिलाएं और कट्टरपंथी संगठन 'घुसपैठिए, बेईमान अरघची- मौत हो' के नारे लगाते हुए लाल और काले रंग के झंडे लहरा रहे थे। इन कट्टरपंथियों का आरोप है कि ईरानी वार्ताकारों ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए हैं और अत्यधिक रियायतें दी हैं, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य पर तेहरान का संप्रभु नियंत्रण बेहद कमजोर हो जाएगा।
शांति वार्ता के बीच ईरान के चार सबसे बड़े सरकारी बैंकों पर भीषण साइबर हमला, संचार ढांचा ठप
इस बेहद संवेदनशील कूटनीतिक रस्साकशी के बीच रविवार को ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले चार प्रमुख राष्ट्रीय बैंकों पर एक बहुत बड़ा और रहस्यमयी साइबर हमला (Cyber Attack) हुआ है। सरकारी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस डिजिटल हमले के कारण बैंक मेल्ली, बैंक तेजरत, बैंक सदेरात और ईरान एक्सपोर्ट डेवलपमेंट बैंक की ऑनलाइन बैंकिंग और एटीएम सेवाएं कई घंटों तक पूरी तरह से ठप हो गईं। देश की बैंकिंग समन्वय परिषद ने आनन-फानन में बयान जारी कर स्पष्ट किया कि इस खतरनाक मैलवेयर हमले में साझा संचार बुनियादी ढांचे (Shared Communication Infrastructure) को निशाना बनाया गया था, लेकिन उनकी तकनीकी टीमों ने समय रहते सुरक्षा उपाय सक्रिय कर दिए, जिससे किसी भी नागरिक या वीआईपी ग्राहक का कोई वित्तीय डेटा लीक नहीं हुआ है। विशेषज्ञ इस साइबर हमले को शांति वार्ता को पटरी से उतारने की एक अंतरराष्ट्रीय साजिश के रूप में देख रहे हैं।
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