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डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को सौंपा स्पेशल मिशन, ईरान को मनाने की जिम्मेदारी, क्या सफल होंगे शाहबाज शरीफ?

News India Live, Digital Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी नई विदेश नीति के तहत एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को ईरान के साथ मध्यस्थता करने और उसे परमाणु व क्षेत्रीय मुद्दों पर नरम रुख अपनाने के लिए राजी करने का ‘कठिन कार्य’ सौंपा है। ट्रंप का यह फैसला न केवल दक्षिण एशिया बल्कि पूरे मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या आर्थिक तंगी से जूझ रहा पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच जमी बर्फ को पिघला पाएगा?ट्रंप का ‘पाकिस्तान कार्ड’: आखिर क्या है मंशा?डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से ‘डील मेकर’ की छवि के लिए जाने जाते हैं। रिपोर्टों की मानें तो ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को एक नया आयाम देने की कोशिश की है। अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान अपने पड़ोसी देश ईरान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे ताकि तेहरान और वाशिंगटन के बीच चल रहा तनाव कम हो सके। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि पाकिस्तान के ईरान के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध उसे एक बेहतर मध्यस्थ बना सकते हैं। यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि ट्रंप ईरान पर ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (Maximum Pressure) की नीति को एक नए तरीके से लागू करना चाहते हैं।पाकिस्तान के लिए ‘करो या मरो’ जैसी स्थितिपाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा है। एक तरफ पाकिस्तान को अमेरिका से वित्तीय सहायता और समर्थन की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ वह अपने पड़ोसी ईरान को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकता। अगर पाकिस्तान इस मध्यस्थता में सफल होता है, तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसका कद काफी बढ़ जाएगा। लेकिन, अगर वह विफल रहा, तो उसे ट्रंप की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है, जो पहले भी पाकिस्तान की मदद रोकने की चेतावनी दे चुके हैं।ईरान का रुख: क्या वह पाकिस्तान की बात सुनेगा?ईरान और पाकिस्तान के रिश्ते पिछले कुछ समय में उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। सीमा विवाद और आतंकी हमलों के बावजूद दोनों देशों के बीच संवाद बना हुआ है। हालांकि, ईरान अच्छी तरह जानता है कि पाकिस्तान इस समय अमेरिकी दबाव में काम कर रहा है। ऐसे में तेहरान किसी भी समझौते पर पहुंचने से पहले अपनी शर्तों पर अडिग रह सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक अमेरिका उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने का कोई ठोस भरोसा नहीं देता।क्या भारत पर पड़ेगा इसका असर?ट्रंप द्वारा पाकिस्तान को इस महत्वपूर्ण भूमिका में लाना भारत के लिए भी गौर करने वाली बात है। भारत के ईरान के साथ चाबहार पोर्ट जैसे रणनीतिक संबंध हैं। अगर पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच पुल का काम करता है, तो क्षेत्रीय समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है। ट्रंप की यह ‘नई गेम प्लान’ सफल होगी या नहीं, यह आने वाले कुछ हफ्तों में साफ हो जाएगा।