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तिरुपति बालाजी मंदिर के वो 5 रहस्य जिन्हें विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया मूर्ति को आता है पसीना, बाल हैं असली और जलता है बिना तेल का दीया

News India Live, Digital Desk: आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर (Tirupati Balaji Temple) दुनिया के सबसे अमीर और रहस्यमयी मंदिरों में से एक है। भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले ‘वेंकटेश्वर स्वामी’ के इस धाम से जुड़ी कुछ ऐसी अलौकिक बातें हैं, जो तर्क और विज्ञान की समझ से परे हैं।जी न्यूज (Zee News) की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए तिरुपति बालाजी के उन रहस्यों के बारे में, जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे:1. मूर्ति को आता है असली पसीनाहैरानी की बात है कि मंदिर के गर्भगृह में स्थित भगवान बालाजी की मूर्ति का तापमान हमेशा 38 डिग्री सेल्सियस (मानव शरीर के तापमान के समान) रहता है। सुबह के समय जब भगवान का अभिषेक किया जाता है, तो मूर्ति से पसीने की बूंदें निकलती हैं। पुजारियों को रेशमी कपड़े से इस पसीने को बार-बार पोंछना पड़ता है।2. असली और रेशमी बाल (Natural Hair)मान्यता है कि भगवान बालाजी की मूर्ति पर लगे बाल असली हैं। ये बाल कभी उलझते नहीं हैं और हमेशा मुलायम व रेशमी बने रहते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान के सिर पर चोट लगने से उनके कुछ बाल गिर गए थे, तब ‘नीला देवी’ नाम की गंधर्व राजकुमारी ने अपने बाल काटकर भगवान को दे दिए थे।3. बिना तेल और बाती के जलता है दीयाभगवान की मूर्ति के सामने एक दीपक हमेशा जलता रहता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस दीये में कभी तेल या घी नहीं डाला जाता। यह दीया हजारों सालों से अखंड रूप से कैसे जल रहा है, यह आज भी एक अनसुलझी पहेली है।4. समुद्र की लहरों की गूंजयदि आप भगवान बालाजी की मूर्ति के पीछे अपना कान लगाएंगे, तो आपको वहां से समुद्र की लहरों जैसी आवाज सुनाई देगी। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि भगवान की मूर्ति हमेशा ‘नम’ (Moist) रहती है, मानो वे अभी समुद्र से निकलकर आए हों।5. अद्भुत रसायन ‘पचई कपूर’आम तौर पर किसी भी पत्थर पर यदि कपूर लगाया जाए, तो वह समय के साथ चटक जाता है। लेकिन तिरुपति बालाजी की मूर्ति पर ‘पचई कपूर’ (हरा कपूर) लगाया जाता है, जिसका पत्थर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। वैज्ञानिकों ने भी इस पर शोध किया, लेकिन वे इसका कारण नहीं ढूंढ पाए।दर्शन करने वालों के लिए खास जानकारीअनोखी परंपरा: तिरुपति में भक्त अपने बाल दान करते हैं, जिसे ‘मोक्ष’ का मार्ग माना जाता है।मूर्ती की स्थिति: देखने में मूर्ति गर्भगृह के बीच में लगती है, लेकिन वास्तव में वह दाईं ओर स्थित है।प्रसाद: यहाँ का ‘तिरुपति लड्डू’ अपनी विशिष्ट बनावट और स्वाद के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है और इसे GI टैग भी प्राप्त है।