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तेजस्वी यादव को खगड़िया में रैली के लिए मिली सिर्फ 1 मीटिंग की इजाज़त, वहीं अमित शाह के लिए दो, RJD नेता भड़के

News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में लोकसभा चुनाव के बाद भी प्रशासनिक अनुमति को लेकर खींचतान जारी है। हाल ही में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को एक बड़े मामले पर आपत्ति हुई है, जिसने उन्हें बिहार की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था पर खुलकर हमला करने का मौका दे दिया।दरअसल, यह पूरा मामला खगड़िया (Khagaria) जिले का है, जहां रैली की अनुमति को लेकर राज्य प्रशासन ने तेजस्वी यादव और बीजेपी के शीर्ष नेता अमित शाह (Amit Shah) के लिए अलग-अलग नियम अपनाए।तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि जब उन्हें खगड़िया में जनसभा करनी थी, तो प्रशासन ने अंतिम समय में सिर्फएक मीटिंग की इजाज़त दी, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली के लिए दो बैठकों/जनसभाओं की अनुमति दी गई थी। इस ‘पक्षपाती रवैये’ पर RJD नेता ने कड़ी आपत्ति जताई है।क्या है पूरा मामला?यह मामला हाल के लोकसभा चुनावों से जुड़ा हुआ लगता है, जब खगड़िया लोकसभा सीट पर महागठबंधन (Grand Alliance) की तरफ से तेजस्वी यादव सक्रिय प्रचार कर रहे थे।अमित शाह की रैलियां: वहीं, उन्हें यह पता चला कि बीजेपी के कद्दावर नेता और गृह मंत्री अमित शाह की रैलियों के लिए न केवल आसानी से बल्किदो-दो मीटिंग के लिए परमिशन दी गई।RJD नेता ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे तौर पर मौजूदा बिहार प्रशासन (जिसमें बीजेपी शामिल है) पर’नाइंसाफी’ और’पक्षपात’ का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र में विपक्षी दल को बराबरी का मौका नहीं देने जैसा है।तेजस्वी का पलटवार: क्या सरकार डर रही है?तेजस्वी यादव ने तंज़ कसते हुए पूछा कि क्या यह दिखाता है कि वर्तमान सरकार उनकी लोकप्रियता और उनके कार्यक्रमों में उमड़ रही भीड़ से डरती है? उन्होंने दावा किया कि सत्ता पक्ष लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि विपक्षी नेताओं को ज्यादा भीड़ इकट्ठा करने का मौका न मिले।प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई स्पष्टीकरण अभी तक नहीं आया है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने हमेशा कहा है कि अनुमति देते समय वे सिर्फ कानून और व्यवस्था की स्थिति और ट्रैफिक नियंत्रण को देखते हैं।राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह आरोप-प्रत्यारोप का दौर बिहार की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को और गर्माएगा और यह साबित करता है कि चुनावी माहौल खत्म होने के बावजूद सत्ता और विपक्ष के बीच अधिकारों को लेकर लड़ाई जारी है।