
देश में आगामी त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले घरेलू रसोई के सबसे अहम बजट पर बड़ा असर पड़ता दिखाई दे रहा है। 10 मिनट में ग्रॉसरी डिलीवरी का दावा करने वाले क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों चीनी की भारी किल्लत और स्टॉक आउट की स्थिति बन गई है। ब्लिंकिट (Blinkit), स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart), जेप्टो (Zepto), बिगबास्केट (BigBasket), अमेजन (Amazon) और यहां तक कि डी-मार्ट (D-Mart) जैसे बड़े रिटेलर्स ने भी ग्राहकों द्वारा चीनी की थोक खरीद पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं। ऑनलाइन कार्ट में अब ग्राहक अपनी मर्जी के मुताबिक चीनी के बड़े पैकेट नहीं जोड़ पा रहे हैं। कहीं प्रति ऑर्डर 1 किलो, कहीं 2 किलो तो कहीं अधिकतम 12 किलो तक की सीमा तय कर दी गई है। इस राशनिंग के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर ब्रांडेड चीनी के दाम भी उछलकर 70 रुपये से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
प्लेटफॉर्म्स पर राशनिंग का नया गणित: जानिए किस ऐप पर कितनी मिल रही चीनी
अलग-अलग शहरों और प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद सीमा अलग-अलग तय की गई है, जिससे ग्राहकों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए कई ऐप्स का सहारा लेना पड़ रहा है।
ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन (Amazon) पर कई प्रमुख ब्रांड्स की चीनी पर प्रति ग्राहक अधिकतम 2 किलो की सीमा लगा दी गई है। स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) पर दिल्ली-एनसीआर और अन्य प्रमुख शहरों में कुछ चुनिंदा ब्रांड्स के केवल 1-1 किलो के दो पैकेट या सिंगल पैक ही खरीदने की अनुमति मिल रही है। ब्लिंकिट (Blinkit) ने कई इलाकों में प्रति ऑर्डर 3 किलो से 5 किलो तक की कैपिंग लागू की है, जबकि 5 किलो और 10 किलो वाले बड़े फैमिली पैक पूरी तरह से ऐप से गायब या 'आउट ऑफ स्टॉक' दिख रहे हैं।
वहीं, टाटा के स्वामित्व वाले बिगबास्केट (BigBasket) ने दिल्ली-एनसीआर के कुछ चुनिंदा इलाकों में अधिकतम 12 किलो तक की छूट दी है, लेकिन कई अन्य शहरों में यह सीमा 5 किलो तक सीमित है। दूसरी तरफ, ऑफलाइन रिटेल चेन डी-मार्ट के कई स्टोर्स पर भी नोटिस चस्पा कर प्रति इनवॉइस सीमित मात्रा में ही चीनी उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंचे दाम
सप्लाई की तंगी का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर लिस्टेड ब्रांडेड और प्रोसेस्ड क्रिस्टल शुगर के दाम पिछले कुछ हफ्तों में तेजी से बढ़े हैं।
वर्तमान में अमेजन पर धामपुर व्हाइट क्रिस्टल शुगर का 1 किलो का पैकेट करीब 72 रुपये में उपलब्ध है। ब्लिंकिट पर उत्तम शुगर की कीमत लगभग 79 रुपये प्रति किलो और फॉर्च्यून शुगर करीब 75 रुपये प्रति किलो पर बिक रही है। स्विगी इंस्टामार्ट पर मधुर शुगर का 2 किलो का पैक (1kg x 2) लगभग 128 रुपये से 135 रुपये के भाव पर लिस्ट है। बिगबास्केट पर मवाना प्रीमियम क्रिस्टल शुगर के दाम 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुके हैं, जबकि बीबी पॉपुलर शुगर करीब 71 रुपये प्रति किलो मिल रही है। खुदरा बाजार में भी सामान्य चीनी की औसत कीमतें जो पहले 45 से 48 रुपये प्रति किलो थीं, वे बढ़कर 55 रुपये प्रति किलो के पार निकल गई हैं।
आखिर क्यों पैदा हुआ चीनी का संकट और क्यों लगी लिमिट?
मार्केट एक्सपर्ट्स और एग्री-कमोडिटी विश्लेषकों के अनुसार, इस किल्लत के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं:
पहला कारण, आगामी गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों से पहले अचानक मांग में आया भारी उछाल है। इस दौरान घरों में मिठाइयों और पकवानों की खपत कई गुना बढ़ जाती है, जिसके चलते आम उपभोक्ता और छोटे हलवाई एडवांस में स्टॉक जुटाने लगते हैं।
दूसरा कारण, क्विक कॉमर्स का 'डार्क स्टोर' मॉडल है। क्विक कॉमर्स कंपनियां सीमित जगह वाले लोकल वेयरहाउस (Dark Stores) से काम करती हैं। यदि कोई एक ही ग्राहक 20 या 30 किलो चीनी का बल्क ऑर्डर कर दे, तो उस इलाके का पूरा डार्क स्टोर खाली हो जाता है और बाकी सैकड़ों ग्राहकों के लिए प्रोडक्ट 'आउट ऑफ स्टॉक' हो जाता है। इसलिए माइक्रो-लेवल पर स्टॉक की उपलब्धता बनाए रखने और सभी ग्राहकों तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए यह राशनिंग लागू की गई है।
तीसरा कारण, थोक मंडियों में सप्लाई का दबाव और जमाखोरी की आशंका है। देश के कुछ प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में पिछले पेराई सत्र के दौरान उत्पादन अनुमानों में उतार-चढ़ाव देखा गया था। थोक व्यापारियों द्वारा संभावित मुनाफाखोरी और जमाखोरी को रोकने के लिए भी प्लेटफॉर्म्स ने यह कदम उठाया है।
घरेलू बाजार में राहत के लिए सरकार का बड़ा एक्शन
त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की कीमतों को बेकाबू होने से रोकने और आम जनता को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने तुरंत कड़े नीतिगत कदम उठाए हैं। सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए 10 लाख टन (1 मिलियन टन) कच्चे चीनी के ड्यूटी-फ्री (कर-मुक्त) आयात को मंजूरी दे दी है। यह आयात कोटा आगामी अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा, जिससे रिफाइनरी से चीनी तैयार होकर तेजी से खुदरा बाजार तक पहुंचेगी।
इसके साथ ही, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने थोक खरीदारों, मिलों और बड़े ट्रेडर्स के लिए स्टॉक रखने की समय सीमा को घटाकर सख्त कर दिया है। सरकार ने साफ किया है कि देश में चीनी का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है और उत्पादन के आंकड़े मांग को पूरा करने के लिए सक्षम हैं। आयातित खेप के बाजार में उतरते ही सप्लाई चेन की बाधाएं दूर होने और कीमतों में नरमी आने की पूरी उम्मीद है।
उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों पर क्या हो रहा असर?
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर लगी इस खरीद सीमा का सबसे ज्यादा असर बड़े संयुक्त परिवारों, शादी-विवाह की तैयारियों में जुटे आयोजकों और छोटे कैटरर्स पर पड़ रहा है। जिन परिवारों को 15 से 25 किलो चीनी की जरूरत है, उन्हें अब अलग-अलग ऐप्स से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ऑर्डर करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें बार-बार डिलीवरी फीस और हैंडलिंग चार्ज चुकाना पड़ रहा है।
नतीजतन, क्विक कॉमर्स पर निर्भर रहने वाले शहरी उपभोक्ता अब एक बार फिर अपने नजदीकी पारंपरिक किराना स्टोर्स और थोक गल्ला मंडियों का रुख कर रहे हैं, जहां चीनी बिना किसी पाबंदी के बोरी और खुले वजन में आसानी से उपलब्ध हो रही है।
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