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दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों पर CAIT ने राहुल गांधी से पूछे 5 सवाल

देश की राजधानी नई दिल्ली में हाल के दिनों में हुए राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों और रैलियों के कारण व्यापार ठप होने और करोड़ों रुपये के नुकसान पर देश के सबसे बड़े व्यापारी संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने तीखा रुख अपनाया है। CAIT के राष्ट्रीय महासचिव और पदाधिकारियों ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर सीधे और कड़े सवाल दागे हैं। संगठन ने पूछा है कि क्या लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध जताने का अधिकार आम नागरिक और व्यापारियों के व्यापार करने तथा रोजी-रोटी कमाने के मौलिक अधिकार से भी बड़ा हो गया है? व्यापारी संगठन ने स्पष्ट किया है कि राजनीतिक रैलियों और लंबे समय तक सड़कों को जाम करने के कारण दिल्ली के बाजारों में ग्राहकों की पहुंच खत्म हो जाती है, जिससे त्योहारों और व्यावसायिक सीजन के दौरान व्यापारियों को भारी वित्तीय क्षति उठानी पड़ती है। इसके साथ ही कैट ने दिवाली के बाद राष्ट्रीय बैठक बुलाकर पूरे देश में 'धिक्कार दिवस' मनाने का बड़ा ऐलान भी किया है।

राजनीतिक रैलियों से दिल्ली का व्यापार प्रभावित और दोहरे रुख पर सवाल

CAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने बयान जारी करते हुए कहा कि दिल्ली में बार-बार आयोजित होने वाली विशाल राजनीतिक रैलियों और प्रदर्शनों के कारण कनॉट प्लेस, चांदनी चौक, करोल बाग, और सदर बाजार जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों की गतिविधियां पूरी तरह थम जाती हैं। CAIT ने विशेष रूप से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी इंडिया गठबंधन द्वारा आयोजित की गई विशाल रैली और अन्य प्रदर्शनों पर आपत्ति जताई। संगठन ने राहुल गांधी के उस रुख पर तीखा सवाल उठाया जिसमें वे एक तरफ जनता से "स्थानीय बाजारों (Local Markets) से सामान खरीदने" की अपील करते हैं, वहीं दूसरी तरफ ऐसे बड़े विरोध प्रदर्शनों और रैलियों का आयोजन या समर्थन करते हैं, जिनसे सड़कें बंद हो जाती हैं और ग्राहक उन स्थानीय बाजारों तक पहुंच ही नहीं पाते। CAIT ने इसे एक बड़ा राजनीतिक विरोधाभास बताया है।

CAIT द्वारा राहुल गांधी और कांग्रेस से पूछे गए 5 सीधे सवाल

व्यापारी संगठन ने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए राहुल गांधी से निम्नलिखित 5 मुख्य सवाल पूछे हैं:

  1. विरोध बनाम आजीविका: क्या संविधान के तहत विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार व्यापारियों के व्यापार करने और आजीविका कमाने के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(g)) से अधिक महत्वपूर्ण है?

  2. आर्थिक बंधक और नुकसान की भरपाई: क्या देश की राजधानी की व्यावसायिक और आर्थिक गतिविधियों को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के लिए बंधक बनाना राजनीतिक और नैतिक रूप से उचित है? रैलियों के कारण व्यापारियों को हुए करोड़ों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

  3. दोहरा रवैया: एक तरफ स्थानीय बाजारों से खरीदारी की अपील करना और दूसरी तरफ ऐसे प्रदर्शनों का समर्थन करना जिससे ग्राहक बाजारों तक न पहुंच सकें, क्या यह व्यापारियों की रोजी-रोटी पर हमला नहीं है?

  4. जवाबदेही और जिम्मेदारी: क्या कांग्रेस पार्टी और उसके राजनीतिक सहयोगी दल उन प्रदर्शनों से पैदा हुई भारी आर्थिक बदहाली की सीधी नैतिक और आर्थिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं?

  5. व्यक्तिगत कसौटी: अगर इसी तरह लंबे समय तक राजनीतिक प्रदर्शनों या बंदी के कारण खुद राहुल गांधी के अपने कारोबार, परिवार की आजीविका या दैनिक कमाई पर असर पड़ता, तो क्या वे इसे स्वीकार करते?

संविधान के अनुच्छेद 19 और 'धिक्कार दिवस' का ऐलान

CAIT ने अपने पत्र में कानूनी और संवैधानिक पहलुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को शांतिपूर्वक अभिव्यक्ति और विरोध का अधिकार देता है, लेकिन अनुच्छेद 19(1)(g) हर नागरिक को स्वतंत्रता से अपना व्यापार और आजीविका चलाने का अधिकार भी प्रदान करता है। किसी एक अधिकार का इस्तेमाल दूसरे नागरिक के मौलिक अधिकार को छीनने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। CAIT ने कहा है कि व्यापारी किसी भी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें 'पंचिंग बैग' नहीं बनाया जा सकता। संगठन ने चेतावनी दी है कि वे राहुल गांधी के आधिकारिक जवाब का इंतजार करेंगे। दिवाली के तुरंत बाद दिल्ली में देशभर के प्रमुख व्यापारी नेताओं की आपात बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें विरोध प्रदर्शनों से होने वाले व्यापारिक नुकसान के खिलाफ देशभर में 'धिक्कार दिवस' मनाने की तारीख की घोषणा होगी।

क्या निकलेगा इस विवाद का समाधान?

व्यापारी संघों के इस कड़े रुख के बाद राजनीतिक गलियारों में यह बहस तेज हो गई है कि लोकतंत्र में विरोध के अधिकार और आर्थिक गतिविधियों की सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। राजधानी दिल्ली के लाखों छोटे-बड़े दुकानदारों का मानना है कि रैलियों के लिए जंतर-मंतर या रामलीला मैदान जैसे स्थानों के विकल्प तय होने चाहिए और मुख्य रास्तों तथा व्यावसायिक इलाकों को ब्लॉक करने से परहेज किया जाना चाहिए। अब देखना यह होगा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी CAIT के इन तीखे सवालों का क्या जवाब देते हैं।