
त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के प्रॉपर्टी बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। दिवाली से ठीक पहले सामने आए आधिकारिक पंजीकरण आंकड़ों ने विश्लेषकों को भी चौंका दिया है, क्योंकि पारंपरिक मान्यताओं और त्योहारी छुट्टियों के बावजूद घर खरीदारों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म नाइट फ्रैंक इंडिया और महाराष्ट्र सरकार के निबंधन एवं मुद्रांक विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर महीने में मुंबई महानगर में कुल 12,690 संपत्तियों का पंजीकरण दर्ज किया गया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 9 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी को दर्शाता है। यह आंकड़ा इसलिए भी बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि अक्टूबर के शुरुआती पखवाड़े में 16 दिनों का पितृपक्ष यानी श्राद्ध काल पड़ा था, जिसे हिंदू परंपराओं में आमतौर पर बड़े निवेश या अचल संपत्ति की खरीद के लिए शुभ नहीं माना जाता। इसके बावजूद मुंबईकरों ने इन मान्यताओं को पीछे छोड़ते हुए जमकर संपत्तियां खरीदीं और श्राद्ध पक्ष के दौरान रोजाना औसतन 311 घरों की रजिस्ट्री कराकर नया रिकॉर्ड कायम कर दिया।
श्राद्ध पक्ष की मान्यताओं पर भारी पड़ा खरीदारों का भरोसा
भारतीय समाज में सदियों से यह मान्यता रही है कि पितृपक्ष के दौरान नई संपत्ति, वाहन या सोना खरीदना टाल दिया जाता है, लेकिन इस बार मुंबई के रियल एस्टेट बाजार ने इस मिथक को पूरी तरह धराशायी कर दिया है। 26 सितंबर से 10 अक्टूबर के बीच चले श्राद्ध काल के दौरान मुंबई में कुल 3,419 संपत्तियों का पंजीकरण हुआ, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले 2 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान प्रतिदिन का औसत पंजीकरण 311 यूनिट रहा, जबकि बीते साल श्राद्ध के दौरान प्रतिदिन औसतन 306 संपत्तियों की रजिस्ट्री हुई थी। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आज का खरीदार केवल शुभ मुहूर्त या पंचांग देखने के बजाय अपने बजट, बिल्डर के फेस्टिव ऑफर्स, ब्याज दरों की स्थिरता और बेहतर लोकेशन पर अधिक ध्यान दे रहा है। जब खरीदार को अपनी मनपसंद जगह पर सही कीमत और आकर्षक पेमेंट प्लान मिलता है, तो वह परंपराओं के इंतजार में सौदा हाथ से जाने नहीं देना चाहता। यही वजह है कि पितृपक्ष में भी मुंबई के निबंधन कार्यालयों में भारी चहल-पहल देखी गई और खरीदारों ने बेझिझक अपने आशियाने की चाबी सुरक्षित की।
सरकारी खजाने में बंपर राजस्व और स्टांप ड्यूटी कलेक्शन में उछाल
अक्टूबर के दौरान हुई इस धमाकेदार बिक्री का सीधा फायदा महाराष्ट्र सरकार के राजस्व विभाग को भी हुआ है। नाइट फ्रैंक के विश्लेषण के अनुसार, अक्टूबर में हुए 12,690 प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से राज्य सरकार को स्टांप ड्यूटी के रूप में लगभग 1,173 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। पिछले साल अक्टूबर 2025 की तुलना में स्टांप ड्यूटी संग्रह में 12 से 13 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह उछाल इस बात का स्पष्ट संकेत है कि न केवल घरों की बिक्री की संख्या बढ़ी है, बल्कि उच्च मूल्य वर्ग यानी प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट के मकानों के सौदे भी बड़े पैमाने पर हुए हैं। जब महंगे और बड़े अपार्टमेंट्स की बिक्री बढ़ती है, तो उसका सीधा असर स्टांप ड्यूटी के औसत संग्रह पर पड़ता है। साल 2026 की शुरुआत से लेकर अक्टूबर तक के पूरे 10 महीनों की बात करें, तो मुंबई में अब तक कुल 1,32,040 संपत्तियों की रजिस्ट्री हो चुकी है, जो बीते वर्ष के मुकाबले 7 प्रतिशत की निरंतर वार्षिक वृद्धि को दर्शाती है। इस दौरान सरकार ने 11,756 करोड़ रुपये से अधिक की स्टांप ड्यूटी जुटाई है।
वेस्टर्न और सेंट्रल सबर्ब्स बने खरीदारों की पहली पसंद
भौगोलिक दृष्टिकोण से देखें तो मुंबई के उपनगरीय इलाकों ने बिक्री के मामले में दक्षिण मुंबई के पारंपरिक इलाकों को काफी पीछे छोड़ दिया है। वेस्टर्न सबर्ब्स जैसे कांदिवली, बोरीवली, मलाड, अंधेरी, गोरेगांव और सेंट्रल सबर्ब्स के मुलुंड, ठाणे वेस्ट, भांडुप, घाटकोपर और विक्रोली में सबसे ज्यादा घर खरीदे गए। इन इलाकों में नई मेट्रो लाइनों के विस्तार, बेहतर रोड कनेक्टिविटी और कोस्टल रोड के चरणों के खुलने से यात्रा का समय काफी कम हुआ है, जिससे कामकाजी वर्ग इन सबर्बन बेल्ट्स में बसने को प्राथमिकता दे रहा है। दक्षिण मुंबई और बांद्रा-जुहू जैसे पॉश इलाकों में जहां सीमित इन्वेंट्री और बेहद ऊंची कीमतें हैं, वहीं उपनगरीय इलाकों में मध्यम आय वर्ग के लिए 1 BHK, 2 BHK और 3 BHK के आधुनिक एमेनिटीज वाले प्रोजेक्ट्स प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इसके अलावा कई प्रमुख डेवलपर्स ने वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और लिंक रोड के आसपास रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पूरे किए हैं, जिससे नए और सुरक्षित फ्लैट्स की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है।
लग्जरी हाउसिंग और बड़े अपार्टमेंट्स की मांग में भारी इजाफा
महामारी के बाद से मुंबईकरों की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव आया है, जहां लोग छोटे घरों के बजाय बड़े, हवादार और वर्क-फ्रॉम-होम अनुकूल स्पेस की तलाश कर रहे हैं। अक्टूबर के बिक्री आंकड़ों से पता चलता है कि 500 से 1,000 वर्ग फुट के कारपेट एरिया वाले 2 और 3 बीएचके फ्लैट्स की हिस्सेदारी कुल बिक्री में सबसे अधिक रही। इसके साथ ही, 5 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले लग्जरी और अल्ट्रा-लक्जरी अपार्टमेंट्स की बिक्री में भी लगातार इजाफा हो रहा है। कॉरपोरेट एग्जीक्यूटिव्स, स्टार्टअप फाउंडर्स और शेयर बाजार के निवेशकों द्वारा अपनी संपत्ति को रियल एस्टेट में सुरक्षित करने की होड़ मची है। दक्षिण मुंबई के वर्ली, लोअर परेल और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) के आसपास के इलाकों में बड़े डुप्लेक्स और सी-फेसिंग पेंटहाउस के सौदे भी सुर्खियों में रहे हैं। खरीदारों की मजबूत क्रय शक्ति और वेतन वृद्धि ने प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट को एक मजबूत सहारा दिया है, जिसके चलते प्रॉपर्टी की कीमतों में 5 से 8 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी के बावजूद मांग पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है।
डेवलपर्स के दिवाली ऑफर्स और होम लोन की स्थिर दरें बनीं मुख्य वजह
दिवाली से ठीक पहले प्रॉपर्टी बाजार में आई इस बंपर तेजी के पीछे डेवलपर्स की आक्रामक मार्केटिंग रणनीतियों और फेस्टिव ऑफर्स का भी बड़ा हाथ रहा है। अधिकांश नामी बिल्डरों ने त्योहारी सीजन को भुनाने के लिए 'नो ईएमआई टिल पजेशन', जीरो स्टांप ड्यूटी स्कीम, मॉड्यूलर किचन और होम अप्लायंसेज जैसे लुभावने गिफ्ट्स की पेशकश की। इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट को स्थिर रखे जाने से होम लोन की ब्याज दरें एक संतुलित दायरे में बनी रहीं, जिससे खरीदारों को अपनी मासिक ईएमआई का सटीक आकलन करने में सहूलियत हुई। बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों ने भी प्रोसेसिंग फीस में छूट और न्यूनतम ब्याज दरों के साथ लोन मेले आयोजित किए, जिसने अनिश्चितता में बैठे खरीदारों को अंतिम फैसला लेने के लिए प्रेरित किया। रियल एस्टेट कंसल्टेंट्स का मानना है कि अक्टूबर का यह प्रदर्शन केवल एक शुरुआत है और नवंबर में दिवाली एवं भाई दूज के मुख्य पर्वों के दौरान यह बिक्री और नए रिकॉर्ड बना सकती है, जिससे मौजूदा वित्त वर्ष मुंबई रियल एस्टेट के इतिहास में सबसे सफल वर्षों में शामिल होने की ओर बढ़ रहा है।
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