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धार भोजशाला पर हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद पहला शुक्रवार, एसपी सचिन शर्मा का ‘सिंघम’ अवतार वायरल

मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील धार (Dhar) जिले में स्थित भोजशाला परिसर को लेकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) के ऐतिहासिक फैसले के बाद आने वाले पहले शुक्रवार को लेकर पूरे शहर में सुरक्षा के बेहद कड़े और अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। क्षेत्र में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा धार की सड़कों पर एक विशाल फ्लैग मार्च निकाला गया। इस फ्लैग मार्च के दौरान धार के पुलिस अधीक्षक (SP) सचिन शर्मा का एक बेहद कड़क और 'सिंघम' रूप देखने को मिला, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एसपी सचिन शर्मा ने खुद सरकारी वाहन पर खड़े होकर हाथ में माइक थामा और सबसे पहले पूरे जोश के साथ 'वंदे मातरम' और 'भारत माता की जय' के नारे लगवाए। "जिसकी हिम्मत है, वो करके देख ले…" एसपी की उपद्रवियों को आखिरी चेतावनी वायरल वीडियो में एसपी सचिन शर्मा फ्लैग मार्च के दौरान जनता और असामाजिक तत्वों को संबोधित करते हुए बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा: "मैं साफ तौर पर उन लोगों को बता देना चाहता हूं जो सोशल मीडिया या किसी भी अन्य मीडिया माध्यम से माननीय हाईकोर्ट के आदेश का गलत अनुवाद (गलत व्याख्या) करके अफवाह फैला रहे हैं, उनके लिए यह प्रशासन की तरफ से मेरी आखिरी समझाइश है। अब तक यानी गुरुवार शाम तक उनका समय था, लेकिन अब से केवल और केवल कानून का पालन होगा और देश में विधि का शासन चलेगा। अब जिसकी हिम्मत है या जो कोई भी यह सोचता है कि वह माहौल खराब कर सकता है, तो वह ऐसा करके देख ले। हमारी टीम उसके लिए पूरी तरह तैयार है। उस पर ऐसी दंडात्मक कानूनी कार्यवाही की जाएगी, जो शायद उसने अपने जीवन में कभी सोची भी नहीं होगी।" ड्रोन, सीसीटीवी और 9-स्तरीय अभेद्य सुरक्षा चक्र में तब्दील हुई भोजशाला सुरक्षा व्यवस्था का ब्योरा देते हुए पुलिस अधीक्षक ने बताया कि भोजशाला परिसर और उसके आसपास के पूरे संवेदनशील इलाके को नौ-स्तरीय (9-Tier) सुरक्षा चक्र में तब्दील कर दिया गया है। कड़ी निगरानी: चप्पे-चप्पे पर वाहनों की सघन चेकिंग, पुलिस की चौबीस घंटे मोबाइल गश्त, चौरहे-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरों की मैपिंग और आसमान से पूरे इलाके पर नजर रखने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों की व्यवस्था शामिल है। भारी बल की तैनाती: धार और आसपास के जिलों से बुलाए गए 1,500 से अधिक सशस्त्र पुलिसकर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था में तैनात किया गया है। कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी की मौजूदगी में शांति समिति की विस्तृत बैठक आयोजित की जा चुकी है, जिसमें दोनों समुदायों के प्रबुद्ध नागरिकों से शांति की अपील की गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि परिसर में ऐसी किसी भी नई धार्मिक गतिविधि या परंपरा को शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिसे पूर्व में वैधानिक स्वीकृति प्राप्त नहीं थी। भोज उत्सव समिति का दावा: 721 साल बाद होने जा रही है 'अखंड पूजा' इस बीच, हिंदू हितों के लिए काम करने वाली 'भोज उत्सव समिति' ने समस्त हिंदू समुदाय के लोगों से शुक्रवार को 11वीं शताब्दी के इस ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में एकत्र होकर सामूहिक ‘अखंड पूजा’ और महाआरती करने का बड़ा आह्वान किया है। समिति के संरक्षक अशोक जैन ने दावा किया कि इतिहास के पन्नों को देखा जाए तो पिछले 721 वर्षों में यह पहला ऐसा शुक्रवार का अवसर होगा, जब हिंदू समाज शुक्रवार के दिन बिना किसी पाबंदी के भोजशाला में भव्य पूजा-अर्चना करेगा। उन्होंने कहा कि यह पूरे समाज के स्वाभिमान से जुड़ा विषय है। तय कार्यक्रम के अनुसार, हिंदू समुदाय के लोग दोपहर के समय धन मंडी चौक पर एकत्र होंगे और वहां से एक अनुशासित जुलूस के रूप में भोजशाला पहुंचकर 'महाआरती' में भाग लेंगे। क्या था भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद पर हाईकोर्ट का फैसला? गौरतलब है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने आगामी 15 मई को दिए अपने ऐतिहासिक और दूरगामी फैसले में इस विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को पूरी तरह से देवी वाग्देवी (मां सरस्वती) का पवित्र मंदिर करार दिया है। इस कड़े फैसले के साथ ही अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के उस दशकों पुराने अंतरिम आदेश को भी पूरी तरह निरस्त (खारिज) कर दिया है, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार को इस परिसर के भीतर नमाज अदा करने की विशेष अनुमति मिली हुई थी। इस ऐतिहासिक फैसले से पहले तक तय व्यवस्था के अनुसार, हिंदू समुदाय को केवल मंगलवार के दिन भोजशाला में पूजा करने का अधिकार था, जबकि मुस्लिम समुदाय लंबे समय से शुक्रवार को वहां जुमे की नमाज अदा करता आ रहा था। दोनों ही पक्ष इस ऐतिहासिक इमारत पर अपना-अपना कानूनी दावा ठोकते रहे हैं, लेकिन हाईकोर्ट के इस ताजा रुख के बाद हिंदू संगठनों ने हाल ही में वहां आतिशबाजी कर 'विजय उत्सव' भी मनाया था। फिलहाल, कोर्ट के निर्देशों को अक्षरशः लागू कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।