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नवंबर 2026 में त्योहारों की महाझड़ी: धनतेरस, दीवाली से लेकर छठ पूजा तक, 1 से 30 तारीख तक के सभी व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट

सनातन संस्कृति, भारतीय परंपरा और वैदिक पंचांग के दृष्टिकोण से वर्ष भर में आने वाले सभी महीनों में नवंबर 2026 (November 2026) का महीना सबसे अधिक आध्यात्मिक, प्रकाशमय और उत्सवपूर्ण माना जा रहा है। अंग्रेजी कैलेंडर का यह ग्यारहवां महीना हिंदू पंचांग के दो बेहद पवित्र और ऊर्जावान महीनों—कार्तिक मास और मार्गशीर्ष (अगहन) मास—की पावन सीमाओं के अंतर्गत आता है। इस साल नवंबर का महीना भारतीय जनजीवन के लिए बेहद खास है, क्योंकि प्रकाश का महापर्व दीवाली, धनतेरस, नरक चतुर्दशी, भैया दूज, गोवर्धन पूजा और लोक आस्था का महान पर्व छठ पूजा जैसे देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण त्योहार इसी एक महीने में आ रहे हैं। घर-घर में दीयों की रोशनी, मिष्ठानों की खुशबू और पूजा-पाठ के अनुष्ठानों से सजे इस महीने की शुरुआत से लेकर अंत तक त्योहारों की एक लंबी और अद्भुत महाझड़ी लगी हुई है। यदि आप भी अपने परिवार के साथ इन सभी पावन पर्वों की सही तारीखों और उनकी धार्मिक महत्ता के बारे में जानना चाहते हैं, तो इस विस्तृत कैलेंडर में 1 नवंबर से लेकर 30 नवंबर तक के सभी प्रमुख व्रत और त्योहारों की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

नवंबर 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहारों की पूरी तारीख-वार सूची

हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, नवंबर के इस पूरे महीने में एक के बाद एक कई बड़े मांगलिक और धार्मिक पर्व आ रहे हैं। आइए नजर डालते हैं इस महीने की पूरी सूची पर:

  • 1 नवंबर 2026 (रविवार): अहोई अष्टमी, कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी

  • 5 नवंबर 2026 (गुरुवार): रमा एकादशी

  • 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार): धनतेरस, यम दीपम

  • 7 नवंबर 2026 (शनिवार): काली चौदस, मासिक शिवरात्रि, भूत चतुर्दशी

  • 8 नवंबर 2026 (रविवार): नरक चतुर्दशी, दीवाली, माता लक्ष्मी और गणेश पूजा, काली पूजा

  • 10 नवंबर 2026 (मंगलवार): गोवर्धन पूजा, अन्नकूट महोत्सव

  • 11 नवंबर 2026 (बुधवार): भैया दूज (यम द्वितीया), चित्रगुप्त पूजा, चंद्र दर्शन

  • 15 नवंबर 2026 (रविवार): महा महापर्व छठ पूजा (नहाय-खाय से आरंभ और सूर्य षष्ठी)

  • 17 नवंबर 2026 (मंगलवार): गोपाष्टमी, मासिक दुर्गाष्टमी

  • 18 नवंबर 2026 (बुधवार): अक्षय नवमी, जगद्धात्री पूजा

  • 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार): देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी)

  • 21 नवंबर 2026 (शनिवार): तुलसी विवाह

  • 23 नवंबर 2026 (सोमवार): वैकुंठ चतुर्दशी

  • 24 नवंबर 2026 (मंगलवार): देव दीवाली, गुरु नानक जयंती, कार्तिक पूर्णिमा स्नान

  • 25 नवंबर 2026 (बुधवार): रोहिणी व्रत

  • 27 नवंबर 2026 (शुक्रवार): गणाधिप संकष्टी चतुर्थी व्रत

महीने की शुरुआत अहोई अष्टमी और रमा एकादशी के पावन अनुष्ठानों से

नवंबर 2026 की शुरुआत ही अत्यंत पवित्र और मातृ प्रेम को समर्पित अहोई अष्टमी (1 नवंबर) के व्रत से हो रही है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, उज्जवल भविष्य और अच्छे स्वास्थ्य के लिए निर्जला उपवास रखती हैं और शाम को तारों को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करती हैं।

इसके तुरंत बाद, दीवाली के ठीक पहले रमा एकादशी (5 नवंबर) का पावन व्रत आ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सभी एकादशियों में रमा एकादशी का भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष महत्व माना गया है। इस दिन व्रत रखने से सभी पापों का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

धनतेरस से लेकर दीवाली और गोवर्धन पूजा तक का भव्य उत्सव

नवंबर का महीना रोशनी और उत्सवों का असली आनंद तब लेकर आता है जब मध्य सप्ताह में धनतेरस और दीवाली के महापर्व आते हैं:

  • धनतेरस और यम दीपम (6 नवंबर): इस दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की जाती है। लोग बर्तन, सोना, चांदी और नए सामान खरीदते हैं, साथ ही शाम को यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है।

  • नरक चतुर्दशी और छोटी दीवाली (8 नवंबर): इस दिन सुबह अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध किया था। इसी दिन शाम को मुख्य दीवाली का पर्व मनाया जाता है, जिसमें घरों को दीपों से सजाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का स्वागत किया जाता है।

  • गोवर्धन पूजा और अन्नकूट (10 नवंबर): दीवाली के अगले दिन गोवर्धन पर्वत, भगवान श्रीकृष्ण और गौ माता की पूजा की जाती है। प्रकृति और पर्यावरण के प्रति आभार जताने का यह पर्व जीवन में अटूट समृद्धि और अन्न के भंडार का प्रतीक है।

  • भैया दूज (11 नवंबर): भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट विश्वास का यह पर्व दीवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है, जिसमें बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं।

लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा और देवउठनी एकादशी का उल्लास

उत्तर भारत सहित पूरे देश में सूर्य उपासना के सबसे कठिन और पवित्र महाव्रत छठ पूजा (15 नवंबर) की धूम इस महीने के मध्य में रहेगी। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में नहाय-खाय से लेकर खरना, संध्या अर्घ्य और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर यह पर्व पूर्ण होता है।

इसके बाद, देवउठनी एकादशी (20 नवंबर) के दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं, जिसके साथ ही चातुर्मास समाप्त होता है और देश भर में शादी-विवाह, गृह प्रवेश तथा अन्य सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों की शुभ शुरुआत हो जाती है। इसके अगले दिन यानी 21 नवंबर को तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है, जिसे बहुत बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा और देव दीवाली के साथ महीने का समापन

नवंबर 2026 के इस पावन महीने का समापन प्रकाश और अध्यात्म के अद्भुत संगम के साथ होगा। 24 नवंबर को देव दीवाली और कार्तिक पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर वाराणसी (काशी) के घाटों पर लाखों दीपों को प्रज्वलित किया जाता है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। इसके साथ ही पवित्र नदियों में स्नान और दान का कार्य भी किया जाता है। इन सभी बड़े त्योहारों के अलावा इस महीने में प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, अक्षय नवमी, वैकुंठ चतुर्दशी और संकष्टी चतुर्थी जैसे कई अन्य व्रत भी आएंगे, जो इस पूरे महीने को आस्था और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण बनाए रखेंगे।