News India Live, Digital Desk: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत को सिरे से खारिज कर दिया है। यह याचिका आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व विधायक सोमनाथ भारती की पत्नी लिपिका मित्रा द्वारा दाखिल की गई थी। लेकिन इस कानूनी जीत से ज्यादा चर्चा उस 29 अक्षरों वाले दुर्लभ अंग्रेजी शब्द की हो रही है, जिसका इस्तेमाल अदालत ने अपने फैसले में किया है। कोर्ट ने इस पूरी याचिका को ‘Floccinaucinihilipilification’ करार दिया है। इस भारी-भरकम शब्द को पढ़ने में अच्छे-अच्छों के पसीने छूट रहे हैं और इंटरनेट पर अचानक से इसका मतलब तलाशा जाने लगा है। आइए आपको बताते हैं कि इस अजीबोगरीब शब्द का अर्थ क्या है और कोर्ट ने आखिर किस संदर्भ में इसका इस्तेमाल किया।Floccinaucinihilipilification: क्या है इस उलझा देने वाले शब्द का असली मतलब?कानूनी मामलों की जानकारी देने वाली रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘Floccinaucinihilipilification’ (फ्लॉक्सीनॉसीनिहिलिपिलिफिकेशन) का सीधा सा अर्थ है किसी ऐसी चीज को बिल्कुल बेकार या कौड़ी के भाव का समझना, जिसकी असल में कोई कीमत न हो। अदालत ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि यह मानहानि की शिकायत और कुछ नहीं बल्कि बिल्कुल बेमानी है। कोर्ट के कहने का तात्पर्य था कि यह एक ऐसी बेकार और बिना सिर-पैर की बात है जिसे बेवजह तिल का ताड़ बनाकर खींचा गया है। इस 29 अक्षरों वाले शब्द का सही उच्चारण (Flok-si-naw-si-ni-hi-li-pi-li-fi-kay-shun) कुछ इस तरह से किया जा सकता है।क्यों खारिज हुआ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ यह मामला?राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) पारस दलाल की अदालत ने साफ कर दिया कि इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही करने का कोई ठोस आधार ही मौजूद नहीं है। इसी वजह से कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेने से साफ इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। दरअसल, लिपिका मित्रा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि 17 मई 2024 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान निर्मला सीतारमण ने उनके पति सोमनाथ भारती की छवि खराब करने और चुनाव में उनकी जीत की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने के इरादे से झूठे और दुर्भावनापूर्ण बयान दिए थे।चुनावी बयानों पर मानहानि नहीं: अदालत की दो टूक टिप्पणीजज ने अपने आदेश में बड़ी बात कहते हुए स्पष्ट किया कि चुनावी माहौल की गर्मी में दिए गए किसी भी राजनीतिक बयान को हर हाल में अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जब कोई राजनेता अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ संभावित तथ्य या आरोप लगाता है, तो उसे मानहानि का रंग नहीं दिया जा सकता। अदालत ने पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस की ट्रांसक्रिप्ट खंगालने के बाद पाया कि वित्त मंत्री का वह बयान मुख्य रूप से आम आदमी पार्टी और विपक्षी गठबंधन (INDIA) पर एक सीधा राजनीतिक प्रहार था। सबसे बड़ी बात यह है कि उस बयान में शिकायतकर्ता (लिपिका मित्रा) का तो कहीं व्यक्तिगत नाम तक नहीं लिया गया था और न ही कोई स्वतंत्र आरोप मढ़ा गया था। प्रेस वार्ता का मुख्य उद्देश्य केवल जनता और मीडिया को यह जताना था कि आम आदमी पार्टी और गठबंधन उन लोगों से जुड़े हैं जिन पर महिलाओं से बदसलूकी के गंभीर आरोप लगे हैं।
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