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न सूर्या जैसी तबाही, न हार्दिक जैसा ऑलराउंडर खेल! फिर भी श्रेयस अय्यर को कप्तान बनाने के पीछे क्या है असली ‘इनसाइड स्टोरी

न सूर्या जैसी तबाही, न हार्दिक जैसा ऑलराउंडर खेल! फिर भी श्रेयस अय्यर को कप्तान बनाने के पीछे क्या है असली 'इनसाइड स्टोरी

भारतीय क्रिकेट टीम हो या आईपीएल का हाई-वोल्टेज मंच, कप्तानी को लेकर लिए जाने वाले फैसले हमेशा फैंस और दिग्गजों को हैरान करते रहे हैं। इस समय क्रिकेट के गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर श्रेयस अय्यर में ऐसा क्या खास है जो उन्हें हर बड़ी जिम्मेदारी के लिए सबसे आगे रखता है। न तो उनके पास सूर्यकुमार यादव जैसी मैदान के चारों तरफ 360 डिग्री में तबाही मचाने वाली विस्फोटक बल्लेबाजी है और न ही वे हार्दिक पांड्या की तरह गेंद और बल्ले दोनों से मैच पलटने का दम रखने वाले ऑलराउंडर हैं। इसके बावजूद श्रेयस अय्यर को लीडरशिप रोल देने के पीछे क्रिकेट बोर्ड और टीम मैनेजमेंट की एक बहुत बड़ी रणनीतिक सोच काम कर रही है, जिसका खुलासा अब धीरे-धीरे होने लगा है।

क्रिकेट की दुनिया में क्यों कप्तानी के मुफीद माने जाते हैं श्रेयस श्रेयस अय्यर के खेल की सबसे बड़ी खासियत उनका शांत स्वभाव और परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालने की कला है। जहां आज के दौर में ज्यादातर खिलाड़ी पहली ही गेंद से आक्रामक रुख अपनाते हैं, वहीं श्रेयस अय्यर पारी को संभालना और मैच को अंत तक ले जाना बखूबी जानते हैं। एक कप्तान के तौर पर उनका दिमाग बेहद कूटनीतिक तरीके से काम करता है। दिल्ली कैपिटल्स से लेकर कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) तक को अपनी कप्तानी में सफलता के शिखर पर पहुंचाने वाले श्रेयस ने यह साबित किया है कि उनके पास बड़े स्टार खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं को एक धागे में पिरोकर टीम को जिताने का एक अनोखा विजन है।

सूर्या और हार्दिक की तुलना में कहां आगे निकलते हैं अय्यर यदि कप्तानी के नजरिए से देखा जाए, तो सूर्यकुमार यादव एक बेहतरीन टी20 खिलाड़ी हैं लेकिन कप्तानी के मोर्चे पर उनकी रणनीतियां कई बार बेहद आक्रामक और जोखिम भरी होती हैं। वहीं दूसरी तरफ हार्दिक पांड्या अक्सर अपनी फिटनेस की समस्याओं और मैदान के बाहर के विवादों के कारण टीम के संतुलन को प्रभावित करते रहे हैं। इन दोनों के मुकाबले श्रेयस अय्यर एक लंबी रेस के घोड़े नजर आते हैं जो खेल के तीनों फॉर्मेट (टेस्ट, वनडे और टी20) में खेलने का माद्दा रखते हैं। उनकी फिटनेस का रिकॉर्ड और कप्तानी का पुराना अनुभव उन्हें मुश्किल समय में एक स्थिर और भरोसेमंद लीडर बनाता है, जिस पर सिलेक्टर्स आंख बंद करके दांव खेल सकते हैं।

मैनेजमेंट के इस बड़े फैसले की असली इनसाइड स्टोरी क्या है अंदर की खबर रखने वाले सूत्रों की मानें तो बीसीसीआई और टीम के थिंक-टैंक को इस समय एक ऐसे कप्तान की तलाश है जो आने वाले बड़े आईसीसी (ICC) टूर्नामेंट्स के लिए टीम इंडिया का भविष्य तैयार कर सके। श्रेयस अय्यर को कप्तानी सौंपने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि वे मैदान पर दबाव के क्षणों में आपा नहीं खोते और गेंदबाजों का इस्तेमाल बहुत चतुरता से करते हैं। ड्रेसिंग रूम में भी खिलाड़ियों के साथ उनका तालमेल कमाल का रहता है। मैनेजमेंट को लगता है कि भले ही श्रेयस में सूर्या जैसी आक्रामकता या हार्दिक जैसी स्टार वैल्यू न हो, लेकिन एक टीम को चैंपियन बनाने के लिए जिस अनुशासन और लीडरशिप की जरूरत होती है, वह अय्यर के पास कूट-कूट कर भरी है।