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पंच पंचायत में ‘वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025’ के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ग्राम पंचायतों की भूमिका पर केशव मौर्य ने किया व्यापक मंथन

वाराणसी में इस सम्मेलन का उद्देश्य 'वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025' के प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायतों की संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करना तथा जमीनी स्तर पर विकास योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित एवं जागरूक करना था। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड एवं उत्तराखंड के लगभग 500 ग्राम पंचायत प्रधानों ने भाग लिया। इनमें उत्तर प्रदेश से 350, बिहार से 75, झारखंड से 50 तथा उत्तराखंड से 25 ग्राम पंचायत प्रधान सम्मिलित हुए। 

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की पुस्तक का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि यह प्रकाशन ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और स्वयं सहायता समूहों की सफलताओं को समाज तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। पीएम गति शक्ति पोर्टल पर गांवों की सड़कें, तालाब, सार्वजनिक परिसंपत्तियां और विकास कार्यों का पूरा विवरण उपलब्ध रहेगा। इससे किसी भी विकास कार्य में दोबारा भुगतान या अनियमितता की संभावना समाप्त होगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से समूह की दीदियों को सीधे 20 हजार रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे अपने स्वरोजगार और लघु उद्योगों का विस्तार कर सकेंगी। डबल इंजन सरकार प्रत्येक गांव में उपलब्ध सरकारी भूमि पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए लघु उत्पादन इकाइयों एवं फैक्टरियों की स्थापना का प्रस्ताव भी ला रही है,

उन्होंने कहा कि वीबीजी राम जी योजना गरीब, मजदूर एवं ग्रामीण परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। इस योजना के माध्यम से श्रमिकों की मजदूरी पूर्ण पारदर्शिता के साथ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए सीधे उनके बैंक खातों में समयबद्ध रूप से पहुंचेगी, जिससे किसी भी प्रकार की बिचौलिया व्यवस्था अथवा भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त होगी। उन्होंने कहा कि यह योजना गरीबों के सम्मान, आत्मनिर्भरता एवं आर्थिक सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेगी। ग्रामीण परिवारों को अब 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों के वैतनिक रोजगार की गारंटी प्रदान की जाएगी, जिससे उनकी आय एवं आजीविका सुरक्षा को और अधिक मजबूती मिलेगी। रोजगार की मांग के लिए आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर कार्य उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा यदि निर्धारित अवधि में रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो संबंधित पात्र व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता प्राप्त करने का कानूनी अधिकार होगा।  मजदूरी का भुगतान निर्धारित समयसीमा में न होने की स्थिति में श्रमिकों को विलंबित भुगतान पर 0.05 प्रतिशत की दर से मुआवजा प्रदान किया जाएगा, जिससे समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित हो सके। यदि श्रमिकों को अपने गांव से 5 किलोमीटर से अधिक दूरी पर कार्य करना पड़ता है, तो उन्हें निर्धारित मजदूरी के अतिरिक्त 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा।  योजना के अंतर्गत जल सुरक्षा एवं जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि जल संसाधनों का संरक्षण एवं सतत उपयोग सुनिश्चित हो सके। ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास से संबंधित कार्यों, जैसे ग्रामीण सड़कें, सार्वजनिक परिसंपत्तियां एवं सामुदायिक सुविधाओं का पक्‍के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। आजीविका संबंधी बुनियादी ढांचे के निर्माण पर विशेष बल दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, कृषि एवं स्वरोजगार गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।  चरम मौसम एवं जलवायु परिवर्तन से बचाव के लिए आवश्यक संरचनाओं एवं संरक्षण कार्यों को भी योजना में शामिल किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की आपदा सहनशीलता एवं पर्यावरणीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाया जा सके।