
बिहार के मौसम ने एक बार फिर से करवट ली है और राज्य के विभिन्न हिस्सों में बादलों की आवाजाही के बीच बारिश का सिलसिला तेज हो गया है. मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) की ओर से जारी ताजा अपडेट के अनुसार, राज्य की राजधानी पटना और गया सहित कुल 18 जिलों में अगले कुछ घंटों के दौरान भारी बारिश और तेज हवाओं का प्रकोप देखने को मिल सकता है. मौसम विभाग की इस चेतावनी के बाद आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है. मानसून की इस सक्रियता से जहां एक तरफ भीषण गर्मी और उमस से बेहाल आम जनता को काफी हद तक राहत महसूस हो रही है, वहीं दूसरी तरफ मौसम के इस बदले हुए तेवर ने किसानों और आम नागरिकों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं. लगातार गिरते तापमान और ठंडी हवाओं के झोंकों ने वातावरण को पूरी तरह से सुहाना बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही मौसम विभाग ने लोगों से पूरी सावधानी बरतने की अपील की है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके.
40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं और वज्रपात का गंभीर खतरा
मौसम विभाग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, जिन 18 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, वहां हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है. तेज आंधी के साथ-साथ बादलों की गरज और आसमानी बिजली (वज्रपात) गिरने की प्रबल आशंका बनी हुई है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बादलों के घर्षण और वातावरण में नमी की प्रचुर मात्रा होने के कारण वज्रपात की घटनाएं तेजी से बढ़ सकती हैं, जो कि इंसानों और मवेशियों दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं. पिछले कुछ दिनों में राज्य के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने से कई दर्दनाक हादसे सामने आ चुके हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन लगातार चेतावनी जारी कर रहा है. मौसम विभाग ने विशेष रूप से खुले आसमान के नीचे काम कर रहे किसानों, मजदूरों और यात्रा कर रहे लोगों को सलाह दी है कि जब भी मौसम खराब हो, वे तुरंत किसी पक्के मकान या सुरक्षित शेल्टर के नीचे शरण लें और पेड़ों के पास बिल्कुल न खड़े हों.
पटना, गया और आसपास के जिलों में कैसा रहेगा मौसम का मिजाज
राजधानी पटना और ऐतिहासिक नगरी गया के अलावा नालंदा, नवादा, जहानाबाद, औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर जैसे दक्षिणी तथा मध्य बिहार के जिलों में मौसम का यह आक्रामक रूप विशेष रूप से देखने को मिल रहा है. सुबह से ही आसमान में बादलों का डेरा है और कई जगहों पर झमाझम बारिश शुरू हो चुकी है, जिससे सड़कों पर जलभराव की स्थिति भी उत्पन्न होने लगी है. जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण निचले इलाकों में पानी भरने से आम राहगीरों और वाहन चालकों को भारी ट्रैफिक जाम व परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 से 48 घंटों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादलों का यह डेरा बना रहेगा और रुक-रुक कर बारिश का यह दौर जारी रह सकता है. तापमान में भी 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे मौसम सुहाना हो गया है, लेकिन नमी के कारण उमस भरी हवाएं भी लोगों को परेशान कर रही हैं.
खेती और किसानों के लिए मौसम की स्थिति का मिला-जुला असर
बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है और यहां की अधिकांश ग्रामीण अर्थव्यवस्था धान की खेती तथा अन्य मानसूनी फसलों पर निर्भर करती है. ऐसे में यह बारिश जहां धान की रोपाई और रुकी हुई फसलों के लिए एक नए जीवनदान के समान है, वहीं दूसरी तरफ तेज हवाओं के कारण खड़ी फसलों के गिरने का भी खतरा बना हुआ है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें ताकि अत्यधिक पानी भरने से फसलें सड़ने न पाएं. इसके अलावा, मौसम के इस मिजाज को देखते हुए आम जनता को भी अनावश्यक रूप से यात्रा करने से बचने की सलाह दी गई है. मौसम की पल-पल बदलती स्थिति पर आपदा प्रबंधन विभाग की पैनी नजर बनी हुई है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला स्तर पर राहत टीमों को भी एलर्ट मोड पर रखा गया है.
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