
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके (PoK) से इस वक्त बेहद परेशान करने वाली और दहला देने वाली खबरें सामने आ रही हैं। बुनियादी अधिकारों, आसमान छूती महंगाई और पाकिस्तानी हुकूमत के सौतेले व्यवहार के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे स्थानीय नागरिकों पर वहां की सुरक्षाबलों ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दी हैं। स्थानीय प्रदर्शनकारियों पर हुए इस भीषण क्रैकडाउन में लाठियां बरसाने से लेकर सीधे गोलियां तक दागने की खबरें हैं। स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अपुष्ट सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि सुरक्षाबलों की इस हिंसक कार्रवाई में अब तक करीब 120 लोगों की जान जा चुकी है, जिससे पूरे क्षेत्र में भयंकर आक्रोश फैला हुआ है।
महंगाई और हक की मांग को लेकर भड़का था जनाक्रोश
पीओके में लंबे समय से आटे, बिजली और बुनियादी चीजों की भारी किल्लत बनी हुई है। पाकिस्तानी सरकार द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण के विरोध में स्थानीय जनता, व्यापारियों और छात्रों ने मिलकर एक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का फैसला किया था। लेकिन प्रदर्शनकारियों की इस आवाज को दबाने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत ने बातचीत का रास्ता चुनने के बजाय ताकत का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते पूरा इलाका एक छावनी में तब्दील हो गया और आम नागरिकों की आवाज को कुचलने के लिए भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों को तैनात कर दिया गया।
लाठियों से पीटा और बरसाईं अंधाधुंध गोलियां
चश्मदीदों और सोशल मीडिया पर सामने आ रहे वीडियोज के अनुसार, सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के नाम पर उन पर सीधा हमला बोल दिया। महिलाओं, बुजुर्गों और नौजवानों को सड़कों पर दौड़ा-दौड़ा कर लाठियों से पीटा गया। जब इससे भी बात नहीं बनी, तो प्रदर्शनकारियों को डराने के लिए उन पर सीधे गोलियां दाग दी गईं। हवा में फायरिंग करने के बजाय सीधे लोगों को निशाना बनाकर गोलियां चलाई गईं, जिसके कारण मौके पर ही कई लोगों ने दम तोड़ दिया और सैकड़ों अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पतालों में घायलों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है।
120 मौतों के दावे से अंतरराष्ट्रीय जगत में खलबली
इस हिंसक कार्रवाई के बाद स्थानीय संगठनों और विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में मृतकों का आंकड़ा 120 तक पहुंचने का बड़ा दावा किया जा रहा है। हालांकि, पाकिस्तानी प्रशासन हमेशा की तरह वास्तविक आंकड़ों को छिपाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। इलाके में तनाव को देखते हुए इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से ठप कर दिया गया है ताकि वहां से हिंसा की तस्वीरें और खबरें बाहर न आ सकें। बावजूद इसके, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों तक यह बात पहुंच चुकी है और इस भीषण नरसंहार को लेकर दुनिया भर में पाकिस्तान की थू-थू हो रही है।
मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन और आगे की स्थिति
पीओके में रहने वाले नागरिक लंबे समय से खुद को पाकिस्तान के उपनिवेश की तरह महसूस कर रहे हैं, जहां उनके पास न तो बोलने की आजादी है और न ही जीने के अधिकार। इस ताजा क्रैकडाउन ने साबित कर दिया है कि पाकिस्तानी हुकूमत वहां की जनता को सिर्फ डरा-धमका कर रखना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मौतों के बाद अब यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है, जिससे आने वाले दिनों में पाकिस्तान सरकार की मुश्किलें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर काफी ज्यादा बढ़ने वाली हैं।
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