
देश में प्रदूषण को कम करने और विदेशों से होने वाले क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) के आयात को घटाने के लिए पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर चल रही है. लेकिन इस बीच आम जनता और गाड़ी मालिकों के मन में एक बड़ा सवाल है कि उन्हें पेट्रोल पंपों पर अपनी पसंद के हिसाब से E10 (10% इथेनॉल) या E20 (20% इथेनॉल) पेट्रोल चुनने का विकल्प क्यों नहीं दिया जा रहा है? इस पर पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय (MoPNG) ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है. मंत्रालय का कहना है कि देश के इतने बड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में पेट्रोल के कई ग्रेड बनाए रखना व्यावहारिक नहीं है और इससे भारी लॉजिस्टिक चुनौतियां खड़ी हो जाएंगी.
एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप, अलग-अलग स्टॉक मैनेज करना नामुमकिन
सरकार ने पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग फ्यूल रखने की मांग को खारिज करते हुए देश के बड़े लॉजिस्टिक सिस्टम का हवाला दिया:
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सप्लाई चेन की मजबूरी: भारत का मौजूदा फ्यूल डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम एक साथ कई तरह के बेस फ्यूल सप्लाई करने के लिए डिजाइन नहीं किया गया है.
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बढ़ जाएगा खर्च: देश में इस समय 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं, जो सीधे रिफाइनरियों, टर्मिनल, डिपो और पाइपलाइनों के विशाल नेटवर्क से जुड़े हैं. अगर हर पंप के लिए E10 और E20 की अलग-अलग सप्लाई चेन बनाई गई, तो तेल के रख-रखाव (Handling) का खर्च बेतहाशा बढ़ जाएगा और स्टॉक मैनेज करना बेहद मुश्किल होगा.
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प्रीमियम पेट्रोल से तुलना गलत: सरकार ने साफ किया कि इसकी तुलना प्रीमियम पेट्रोल से नहीं की जा सकती, क्योंकि प्रीमियम पेट्रोल बेहद सीमित मात्रा में बिकने वाला एक खास (Niche) प्रोडक्ट है, जबकि आम पेट्रोल का वॉल्यूम बहुत बड़ा होता है.
पुरानी गाड़ियों को कोई खतरा नहीं, मारुति और हीरो मोटोकॉर्प के आंकड़ों ने किया साबित
मंत्रालय ने उन वाहन मालिकों की चिंता को पूरी तरह दूर कर दिया है जिनकी गाड़ियां पुरानी हैं और सिर्फ E10 फ्यूल के अनुकूल बनी थीं. सरकार ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का यह ऐतिहासिक फैसला वाहन निर्माताओं (SIAM) और टेस्टिंग एजेंसियों के साथ लंबी बातचीत, गहन प्लानिंग और तकनीकी मूल्यांकन के बाद ही लिया गया है.
कंपनियों का अनुभव: देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान रिकॉर्ड 2.84 करोड़ कारों की सर्विसिंग की. इनमें से करीब 1.5 करोड़ गाड़ियां पुरानी थीं जो E20 सर्टिफाइड नहीं थीं. इसके बावजूद, कंपनी को इथेनॉल मिक्स पेट्रोल के कारण जंग लगने या इंजन खराब होने की एक भी शिकायत नहीं मिली. टू-व्हीलर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी हीरो मोटोकॉर्प का भी यही अनुभव रहा है. वाहन निर्माता कंपनियां पुरानी और नई दोनों गाड़ियों पर पूरी वारंटी दे रही हैं.
माइलेज में 3-5% की मामूली कमी, लेकिन पिक-अप मिलेगा शानदार
सरकार ने ईमानदारी से यह स्वीकार किया है कि E10 के मुकाबले E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों के माइलेज (Fuel Efficiency) में 3 से 5 प्रतिशत की बेहद मामूली कमी आ सकती है. लेकिन ईंधन की गुणवत्ता को सिर्फ माइलेज से नहीं मापा जाना चाहिए.
E20 पेट्रोल का ऑक्टेन नंबर (Octane Number) काफी बेहतर होता है, जिसकी वजह से इंजन के अंदर ईंधन का दहन (Combustion) बहुत अच्छे से होता है. इससे गाड़ी को शानदार पिक-अप (एक्सेलेरेशन) मिलता है, इंजन अंदर से पूरी तरह साफ रहता है और सबसे बड़ी बात कि कार्बन उत्सर्जन (प्रदूषण) में भारी कमी आती है. सरकार ने जोर देकर कहा कि E20 की तरफ यह बदलाव न केवल पर्यावरण और देश की एनर्जी सिक्योरिटी (ऊर्जा सुरक्षा) को मजबूत करने के लिए है, बल्कि इसके जरिए देश के किसानों की आमदनी में भी बड़ा इजाफा हो रहा है.
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