
देश के महानगरों और टियर-2 शहरों में कामकाजी महिलाओं, छात्राओं और दैनिक यात्रियों के लिए ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप-आधारित कैब व बाइक-टैक्सी सेवाएं यात्रा का प्रमुख साधन बन चुकी हैं। हालांकि, देर रात की यात्राओं, ड्राइवर द्वारा मनमाने रूट पर गाड़ी ले जाने और सुरक्षा से जुड़ी अप्रिय घटनाओं ने समय-समय पर डिजिटल मोबिलिटी प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इन चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने देश भर में डिजिटल ट्रांसपोर्ट और कैब एग्रीगेटर्स के लिए एक विस्तृत और सख्त सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर के नेतृत्व में तैयार इन दिशा-निर्देशों को देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजकर इसे जमीनी स्तर पर अनिवार्य रूप से लागू कराने का आग्रह किया गया है। आयोग का स्पष्ट रुख है कि तकनीक की सुविधा किसी भी सूरत में महिला यात्रियों की गरिमा और शारीरिक सुरक्षा की कीमत पर नहीं दी जा सकती।
गाड़ी के भीतर फिजिकल पैनिक बटन और 24×7 कमांड सेंटर अनिवार्य
आयोग द्वारा जारी नई सिफारिशों में सबसे प्रमुख प्रावधान कैब के भीतर 'फिजिकल पैनिक बटन' (SOS Button) की मौजूदगी को लेकर है। अक्सर आपातकालीन स्थिति में महिला यात्री के लिए मोबाइल फोन निकालना, ऐप खोलना या नेटवर्क न होने पर डिजिटल बटन दबाना संभव नहीं हो पाता। ऐसे हालात से निपटने के लिए कैब और टैक्सियों की पिछली सीट के पास ऐसा फिजिकल इमरजेंसी बटन होना चाहिए जिसे दबाते ही सीधे आपातकालीन सायरन बजे और वाहन की जीपीएस लोकेशन सीधे पुलिस कंट्रोल रूम (112) और कंपनी के 24×7 कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को लाइव ट्रांसमिट हो जाए। इसके साथ ही सभी कैब एग्रीगेटर्स को एक चौबीसों घंटे सक्रिय रहने वाला आधुनिक कंट्रोल रूम संचालित करना होगा, जो किसी भी पैनिक अलर्ट या अनहोनी की स्थिति में तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना देकर 15 से 20 मिनट के भीतर जमीनी स्तर पर आपातकालीन सहायता उपलब्ध करा सके।
रास्ता भटकते ही बजेगा अलार्म: रूट डेविएशन और असामान्य ठहराव पर नजर
कैब यात्रा के दौरान कई बार ड्राइवर ऐप द्वारा सुझाए गए सीधे और सुरक्षित रास्ते के बजाय सुनसान गलियों, अनधिकृत रास्तों या विपरीत दिशा में वाहन मोड़ लेते हैं, जिससे महिला यात्रियों में अनजाना भय पैदा हो जाता है। इस जोखिम को पूरी तरह खत्म करने के लिए एनसीडब्ल्यू ने रियल-टाइम रूट डेविएशन ट्रैकिंग (Real-Time Route Deviation Alerts) की सिफारिश की है। यदि कोई कैब तय जीपीएस रूट से अचानक किसी गलत दिशा में मुड़ती है या बीच रास्ते में किसी संदिग्ध और सुनसान जगह पर असामान्य रूप से काफी देर तक खड़ी रहती है, तो सिस्टम स्वतः ही यात्री के फोन और कंट्रोल रूम दोनों को जोर से अलर्ट भेजेगा। इसके तुरंत बाद कमांड सेंटर से यात्री और ड्राइवर दोनों को सुरक्षा कॉल जाएगी ताकि किसी भी अप्रिय घटना को शुरुआत में ही रोका जा सके।
अकेले सफर करने वाली महिलाओं को मिले महिला ड्राइवर चुनने का विकल्प
महिला यात्रियों के मानसिक भरोसे और सहजता को बढ़ाने के लिए आयोग ने एक बेहद दूरगामी सुझाव दिया है। इसके तहत ओला, उबर और अन्य कैब प्लेटफॉर्म्स को अपने नेटवर्क में एक सत्यापित महिला ड्राइवरों का पूल (Verified Pool of Women Drivers) तैयार करने और उसे प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया है। जब कोई महिला यात्री देर रात या अकेले यात्रा के लिए कैब बुक कर रही हो, तो ऐप में उसे यह वैकल्पिक सुविधा मिलनी चाहिए कि वह चाहे तो महिला ड्राइवर का चयन कर सके। हालांकि आयोग ने यह भी माना है कि यह सुविधा ड्राइवरों की उपलब्धता और स्थानीय व्यावहारिकता पर निर्भर करेगी, लेकिन इस विकल्प के जुड़ने से महिलाओं में स्वतंत्र रूप से यात्रा करने का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाएगा।
ड्राइवर या गाड़ी का नंबर मिसमैच होने पर जीरो कैंसिलेशन चार्ज
कई बार बुकिंग के समय ऐप में दिखने वाला ड्राइवर और कार का रजिस्ट्रेशन नंबर मौके पर आने वाले वाहन से पूरी तरह अलग होता है। ऐसे मामलों में जब यात्री असुरक्षा महसूस कर राइड कैंसिल करते हैं, तो कैब कंपनियां उल्टा यात्री पर ही कैंसिलेशन पेनल्टी ठोक देती हैं। एनसीडब्ल्यू ने इस अनैतिक व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया है। मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस के नियमों का हवाला देते हुए आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि आने वाली कार, उसका नंबर या ड्राइवर की शक्ल ऐप में दिखाई गई प्रोफाइल से मेल नहीं खाती है, तो महिला यात्री को बिना किसी कैंसिलेशन चार्ज (Penalty-Free Cancellation) के राइड रद्द करने का पूरा वैधानिक अधिकार होगा। इस तरह के मिसमैच को सीधा सुरक्षा उल्लंघन मानकर कंपनी को संबंधित ड्राइवर के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी होगी।
पुलिस वेरिफिकेशन, एल्कोहल टेस्ट और देर रात की यात्राओं के विशेष नियम
ड्राइवरों को प्लेटफॉर्म से जोड़ने यानी ऑनबोर्डिंग से पहले उनके आपराधिक इतिहास की गहन जांच और अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा ड्राइवरों का हर छह महीने या साल भर में री-वेरिफिकेशन किया जाना चाहिए। देर रात चलने वाली कैबों के लिए विशेष प्रोटोकॉल सुझाए गए हैं—जैसे ट्रिप शुरू होने से पहले ड्राइवर का फेस ऑथेंटिकेशन (लाइव सेल्फी), शराब या नशे की जांच (Intoxication Checks), विश्वसनीय संपर्कों के साथ ऑटो-ट्रिप शेयरिंग और यात्रा समाप्त होने पर सुरक्षित घर पहुंचने की पुष्टि (Safe-Drop Confirmation)। साथ ही सभी ड्राइवरों के लिए जेंडर सेंसिटाइजेशन (लैंगिक संवेदनशीलता) और महिलाओं के साथ शालीन व्यवहार से जुड़ी नियमित अनिवार्य ट्रेनिंग को लागू किया जाएगा, ताकि देश की सड़कों पर हर महिला बिना किसी भय के सुरक्षित सफर कर सके।
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