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प्राइवेट स्कूलों की छुट्टी? बिहार के 700+ स्कूलों में हाईटेक लैब और स्मार्ट क्लास बनाने जा रही नीतीश सरकार

News India Live, Digital Desk : अक्सर जब हम बिहार के सरकारी स्कूलों (Government Schools) की बात करते हैं, तो दिमाग में पुरानी इमारत और बुनियादी सुविधाओं की कमी वाली तस्वीर आती है। लेकिन, अब वक्त बदल रहा है और हमारी धारणा भी बदलनी होगी। बिहार सरकार ने ठान लिया है कि गाँव और कस्बों में पढ़ने वाले बच्चों को अब शहरों जैसी आधुनिक शिक्षा मिलेगी।ताजा खबर यह है कि नीतीश सरकार (Nitish Government) ने राज्य के स्कूलों को हाईटेक बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। अब बिहार के 789 मध्य और उच्च माध्यमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब (ICT Labs) की सुविधा शुरू होने जा रही है।क्या है यह ‘स्मार्ट क्लास’ वाली योजना?आसान शब्दों में कहें तो अब पढ़ाई सिर्फ ‘चॉक और डस्टर’ तक सीमित नहीं रहेगी। जिन 789 स्कूलों को चुना गया है, वहां बच्चों को पढ़ाने के लिए डिजिटल बोर्ड, प्रोजेक्टर और कंप्यूटर लगाए जाएंगे।जरा सोचिए, जो बच्चा कल तक सिर्फ किताबों में फोटो देखकर विज्ञान समझता था, अब वो स्क्रीन पर वीडियो के जरिए देखेगा कि दिल कैसे धड़कता है या सौर मंडल (Solar System) कैसे काम करता है। इसे ही असली डिजिटल क्रांति कहते हैं।ICT लैब: अब बच्चे बनेंगे ‘टेक-स्मार्ट’सिर्फ स्मार्ट क्लास ही नहीं, इन स्कूलों में आईसीटी (ICT) लैब भी बनाई जा रही हैं। आईसीटी का मतलब है- इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी। यानी बच्चों को बचपन से ही कंप्यूटर, इंटरनेट और नई तकनीक का इस्तेमाल करना सिखाया जाएगा।आज के दौर में कंप्यूटर का ज्ञान होना उतना ही जरूरी है जितना कि ककहरा (A B C D) आना। सरकार की कोशिश है कि गरीब घर का बच्चा भी जब स्कूल से निकले, तो वो तकनीक के मामले में प्राइवेट स्कूल के बच्चे से कम न हो।शिक्षकों के लिए भी है बड़ा बदलावसिर्फ उपकरण लगाने से कुछ नहीं होगा, उन्हें चलाने वाले भी तो चाहिए। खबर है कि शिक्षकों को भी इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी कि डिजिटल उपकरणों से बच्चों को आसानी से कैसे पढ़ाया जाए। पढ़ाई को रटने के बजाय ‘समझने’ पर जोर दिया जाएगा।क्यों ज़रूरी था ये कदम?बिहार के कई बच्चे टैलेंटेड तो होते हैं, लेकिन सही सुविधाएं न मिलने की वजह से पीछे रह जाते हैं। डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) आज की सबसे बड़ी जरूरत है। नीतीश सरकार का यह फैसला बिहार की शिक्षा व्यवस्था में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।एक अच्छी शुरुआत789 का आंकड़ा शायद पूरे बिहार के हिसाब से कम लगे, लेकिन शुरुआत तो हुई है। उम्मीद है कि धीरे-धीरे यह सुविधा राज्य के हर सरकारी स्कूल तक पहुंचेगी। फिलहाल, उन 789 स्कूलों के बच्चों और अभिभावकों के लिए तो यह किसी लॉटरी से कम नहीं है। अब स्कूल जाने का मज़ा दोगुना होने वाला है!