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फेविकोल का जोड़ बनाने वाले पीयूष पांडे चले गए, पीछे छोड़ गए ये 8 विज्ञापन जो हमेशा दिलों में रहेंगे

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News India Live, Digital Desk: चल मेरी लूना…”, “दम लगा के हईशा”, “कुछ खास है जिंदगी में”… ये सिर्फ विज्ञापनों की लाइनें नहीं, बल्कि हमारी यादों का एक हिस्सा हैं। इन यादों को रचने वाले कहानीकार, भारतीय विज्ञापन जगत के पितामह पीयूष पांडे अब हमारे बीच नहीं रहे। 70 साल की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन वे अपने पीछे विज्ञापनों की एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जो हमेशा अमर रहेगी।

पीयूष पांडे ने विज्ञापनों को सिर्फ 30 सेकंड का ब्रेक नहीं, बल्कि दिलों को छू लेने वाली छोटी-छोटी कहानियां बना दिया। उन्होंने आम भारतीयों के जीवन, उनकी भावनाओं और उनके देसीपन को विज्ञापनों का हीरो बनाया। आइए, याद करते हैं उनके बनाए 8 ऐसे ही प्रतिष्ठित विज्ञापनों को, जिन्हें भारत कभी नहीं भूल पाएगा।

1. फेविकोल (Fevicol): जोड़ जो कभी नहीं टूटा
“पकड़े रहना, छोड़ना नहीं!” – फेविकोल के विज्ञापन मतलब हंसी और भरोसे का दूसरा नाम। चाहे बस की छत पर भीड़ में बैठे लोगों का विज्ञापन हो या “अंडे वाला” ऐड, पीयूष ने फेविकोल को सिर्फ एक गोंद नहीं, बल्कि मजबूती और अटूट रिश्ते का प्रतीक बना दिया। ये विज्ञापन इतने सरल और मजेदार होते थे कि बच्चे-बच्चे की जुबान पर चढ़ गए।

2. कैडबरी (Cadbury): “कुछ खास है…”
क्रिकेट मैच के बीच में जब एक लड़की सुरक्षा घेरा तोड़कर मैदान पर नाचने लगती है, तो पूरा देश उसके साथ झूम उठता है। “असली स्वाद जिंदगी का” टैगलाइन वाले इस विज्ञापन ने कैडbury को सिर्फ बच्चों की चॉकलेट नहीं, बल्कि हर खुशी के मौके का हिस्सा बना दिया। यह विज्ञापन आज भी भारतीय विज्ञापन के इतिहास के सबसे बेहतरीन पलों में से एक माना जाता है।

3. एशियन पेंट्स (Asian Paints): “हर घर कुछ कहता है”
इस कैंपेन के जरिए पीयूष पांडे ने घरों की दीवारों को जुबान दे दी। उन्होंने बताया कि घर सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं होता, बल्कि उसमें रहने वालों की यादें, सपने और कहानियां बसी होती हैं। यह एक बहुत ही भावनात्मक और सफल अभियान था जिसने लोगों के दिलों को छुआ।

4. मिले सुर मेरा तुम्हारा (Mile Sur Mera Tumhara): देश को एक करने वाला गीत
यह सिर्फ एक विज्ञापन नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय गीत बन गया। 1988 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए इस गीत ने भारत की विविधता में एकता की भावना को खूबसूरती से पिरोया था। पीयूष पांडे ने इस गीत के बोल लिखे थे, जो आज भी रोंगटे खड़े कर देते हैं और हर भारतीय को गर्व से भर देते हैं।

5. फेवीक्विक (Fevikwik): “चुटकियों में चिपकाए”
“अरे! इन्होंने तो फेवीक्विक से मछली पकड़ ली!” – मछली पकड़ने वाले आदमी का वह विज्ञापन भला कौन भूल सकता है। कम शब्दों में और ह्यूमर के साथ कैसे अपनी बात कही जाती है, फेवीक्विक के विज्ञापन इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं।

6. लूना (Luna): “चल मेरी लूना”
एक आम भारतीय की सवारी को पीयूष पांडे ने इस जिंगल के साथ घर-घर में पहुंचा दिया। यह उस दौर के लोगों की आकांक्षाओं और जरूरतों से सीधा जुड़ता था।

7. भारतीय स्टेट बैंक (SBI): “कोई भी कहीं भी बैंकिंग”
SBI के “द बैंकर टू एवरी इंडियन” कैंपेन के पीछे भी पीयूष पांडे का ही दिमाग था। उन्होंने बैंक को सिर्फ पैसा जमा करने की जगह नहीं, बल्कि आम आदमी के भरोसेमंद साथी के रूप में पेश किया।

8. “अबकी बार मोदी सरकार” (2014 Campaign)
विज्ञापन की दुनिया से निकलकर उन्होंने राजनीति में भी अपने शब्दों का लोहा मनवाया। 2014 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के लिए “अबकी बार मोदी सरकार” का नारा उन्हीं की देन था। इस एक लाइन ने पूरे चुनाव का माहौल बदल कर रख दिया था।

पीयूष पांडे भले ही चले गए हों, लेकिन उनकी रचनात्मकता इन विज्ञापनों के रूप में हमेशा हमारे बीच जिंदा रहेगी।

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