
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर एक बार फिर बलूचिस्तान का मुद्दा गर्मा गया है और इस बार वजह भारत का एक बेहद साहसिक और स्पष्ट रुख बना है। पाकिस्तान के अत्याचारों और मानवाधिकारों के हनन का सामना कर रहे बलूचिस्तान के लोगों और नेताओं ने भारत के उस आधिकारिक बयान पर अपनी जबरदस्त प्रतिक्रिया दी है जिसमें बलूचिस्तान की आजादी और वहां के हालात पर बात रखी गई थी। बलोच नेताओं ने भारत के इस कदम को सराहा है और भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) का खुले दिल से शुक्रिया अदा किया है, जिसके बाद से कूटनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।
बलोच नेताओं ने क्यों जताया भारत का आभार?
पाकिस्तान के कब्जे वाले बलूचिस्तान में लंबे समय से मानवाधिकारों के उल्लंघन और स्थानीय नागरिकों पर हो रहे जुल्मों के खिलाफ आवाज उठाई जाती रही है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय मंचों और कूटनीतिक बैठकों में भारत की तरफ से इस संवेदनशील मुद्दे पर मुखर होकर बात रखी गई, तो बलोच कार्यकर्ताओं और नेताओं का हौसला काफी बढ़ गया। बलोच नेशनल मूवमेंट और अन्य प्रमुख संगठनों के नेताओं ने सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों के जरिए भारत सरकार और विदेश मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर उनकी आवाज उठाए जाने से बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की लड़ाई को एक मजबूत नैतिक समर्थन मिला है।
कूटनीतिक मोर्चे पर पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें
भारत की तरफ से बलूचिस्तान के मसले पर उठाए गए इस मुखर कदम ने इस्लामाबाद की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। पाकिस्तान हमेशा से इस क्षेत्र में अपनी दमनकारी नीतियों को दुनिया की नजरों से छिपाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बलोच जनता के पक्ष में उठने वाली आवाजें अब पाकिस्तान के लिए असहज स्थिति पैदा कर रही हैं। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत का यह रुख न केवल क्षेत्रीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों के हनन के मामलों में पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को बेनकाब करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
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