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बिहार के बच्चों की किस्मत बदलने वाली है ,अब सरकारी स्कूलों में मिलेगी कोटा वाली पढ़ाई

News India Live, Digital Desk: बिहार में शिक्षा का क्या हाल रहा है, ये हम सब जानते हैं। लेकिन आलोचनाओं के बीच एक बहुत ही शानदार खबर आई है। अक्सर माता-पिता की गाढ़ी कमाई प्राइवेट स्कूलों की फीस और उसके बाद डॉक्टर-इंजीनियर बनाने के लिए कोचिंग की फीस भरने में निकल जाती है। लेकिन बिहार सरकार अब इस बोझ को हल्का करने जा रही है।राज्य में 572 मॉडल स्कूल (Government Model Schools) बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। और ये स्कूल सिर्फ नाम के लिए नहीं होंगे, यहाँ सुविधाएं ऐसी होंगी जो किसी बड़े प्राइवेट स्कूल को टक्कर दे सकें।क्या ख़ास है इन स्कूलों में?सबसे बड़ी बात— “पढ़ाई + तैयारी”।इन स्कूलों का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यहाँ 10वीं या 12वीं की रेगुलर पढ़ाई तो होगी ही, साथ में प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) के लिए कोचिंग भी दी जाएगी। मतलब अगर आपका बच्चा इंजीनियरिंग (JEE) या मेडिकल (NEET) करना चाहता है, तो उसे अलग से लाखों रुपये देकर कोचिंग नहीं जाना पड़ेगा। यह सुविधा स्कूल के अंदर ही मिलेगी।हाई-टेक सुविधाएंहम अक्सर सरकारी स्कूलों में टूटी बेंच और गायब मास्टरों की कहानी सुनते हैं। लेकिन इन मॉडल स्कूलों का नक्शा अलग होगा।स्मार्ट क्लासेज: पढ़ाई ब्लैकबोर्ड पर नहीं, डिजिटल स्क्रीन्स पर होगी।मॉडर्न लैब: साइंस के प्रैक्टिकल के लिए अत्याधुनिक लैब्स बनाई जाएंगी।लाइब्रेरी और कंप्यूटर: छात्रों के लिए अच्छी लाइब्रेरी और कंप्यूटर की व्यवस्था होगी।मकसद क्या है?सरकार का मकसद साफ़ है— टैलेंट को पैसे की कमी की वजह से रुकने नहीं देना है। गांव-देहात के बच्चे, जिनमें काबिलियत तो बहुत है पर साधन नहीं हैं, वे इन स्कूलों का सबसे ज्यादा फायदा उठा पाएंगे। शिक्षा विभाग इस साल (2026) के अंदर इस काम को रफ़्तार देने के मूड में है।अभिभावकों के लिए राहतसोचिए, अगर स्कूल की फीस नाममात्र की हो और कोचिंग का पैसा भी बच जाए, तो एक मध्यम वर्गीय परिवार को कितनी राहत मिलेगी। अगर यह प्रोजेक्ट सही तरीके से ज़मीन पर उतर गया, तो यह बिहार के ‘एजुकेशन सिस्टम’ में एक क्रांति ला सकता है।अब बस उम्मीद यही है कि इमारतें जल्दी खड़ी हों और उनमें अच्छे शिक्षक नियुक्त हों, ताकि ‘मॉडल स्कूल’ का सपना सच में साकार हो सके।