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बिहार बिजली विभाग में महाघोटाला? अगस्त 2024 की रेड और अब 2026 में FIR ,फाइलें दबाकर बैठे रहे अफसर

News India Live, Digital Desk : बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों के बीच बिजली विभाग से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। जिस मामले में अगस्त 2024 में ही छापेमारी (Raid) कर बड़े सुराग हाथ लगे थे, उस पर एफआईआर दर्ज करने में विभाग को पूरे 18 महीने लग गए। फरवरी 2026 में दर्ज हुई इस एफआईआर ने विभाग के भीतर चल रहे ‘गड़बड़झाले’ की एक लंबी फेहरिस्त खोल दी है।छापेमारी के बाद क्यों थमी रही कार्रवाई?अगस्त 2024 में सतर्कता विभाग और बिजली विभाग की संयुक्त टीम ने कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान करोड़ों की हेराफेरी, अवैध कनेक्शन और उपकरणों की खरीद में भारी अनियमितता के सबूत मिले थे। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि:आखिर किसके दबाव में डेढ़ साल तक फाइलें दबी रहीं?अगस्त 2024 से फरवरी 2026 के बीच उन आरोपियों को क्यों मौका दिया गया जो साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते थे?अनियमितताओं की लंबी है लिस्टरिपोर्ट्स के अनुसार, बिजली विभाग में गड़बड़ी का यह खेल केवल एक जिले तक सीमित नहीं है। एफआईआर में दर्ज मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार हैं:स्मार्ट मीटर और उपकरणों की खरीद: मीटर की खरीद और इंस्टॉलेशन में मानकों की अनदेखी और वित्तीय धांधली।फर्जी बिलिंग का खेल: बड़े उपभोक्ताओं को फायदा पहुँचाने के लिए बिलों में हेरफेर और बकाया वसूली में लापरवाही।अवैध वसूली: छापेमारी के दौरान पकड़े गए भ्रष्टाचार के मामलों को रफा-दफा करने के लिए कथित रूप से रिश्वत की मांग।सिस्टम की ‘लेटलतीफी’ पर उठे सवालअगस्त 2024 में हुई कार्रवाई के बाद फरवरी 2026 में एफआईआर दर्ज होना यह दर्शाता है कि विभाग के भीतर ही कुछ ऐसी शक्तियां सक्रिय थीं जो जांच को प्रभावित कर रही थीं। अब जब मामला सार्वजनिक हुआ है, तो विपक्षी दलों ने भी नीतीश सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।