
हिंदू धर्म का सबसे पवित्र महीना,कार्तिक मास चल रहा है और त्योहारों की रौनक चारों तरफ है। इसी पवित्र महीने में आता है भगवान शिव और माता पार्वती का सबसे प्रिय व्रत—प्रदोष व्रत। यह वो दिन है जब माना जाता है कि महादेव सबसे ज़्यादा प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।इस बार यह व्रत और भी ज़्यादा खास होने वाला है,क्योंकि यह धन और समृद्धि के पर्वधनतेरस (18अक्टूबर)के दिन ही पड़ रहा है! यह एक ऐसा अद्भुत संयोग है जब आपको धन के देवता कुबेर के साथ-साथ महादेव का भी आशीर्वाद एक ही दिन मिल सकता है।तो चलिए जानते हैं इस बेहद शुभ दिन की सही तारीख,पूजा का समय और इसका महत्व।व्रत18को या19को?कन्फ्यूजन दूर कर लीजिएअक्सर व्रत की तारीख को लेकर उलझन हो जाती है,क्योंकि तिथि दो दिन तक फैली होती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही है:त्रयोदशी तिथि शुरू होगी: 18अक्टूबर,दोपहर12:18बजेत्रयोदशी तिथि खत्म होगी: 19अक्टूबर,दोपहर01:51बजेअब आप सोच रहे होंगे कि तिथि तो19अक्टूबर की दोपहर तक है,तो फिर व्रत18को क्यों?इसका कारण यह है कि ज़्यादातर व्रत सूर्योदय की तिथि (उदया तिथि) से रखे जाते हैं,लेकिन प्रदोष व्रत का असली महत्व सूर्योदय में नहीं,बल्किशाम के समय (प्रदोष काल)की पूजा में होता है।चूंकि पूजा का शुभ मुहूर्त18अक्टूबर की शामको ही मिल रहा है,इसलिएप्रदोष व्रत18अक्टूबर,शुक्रवार को ही रखा जाएगा।इस बार बन रहा है बेहद खास’शिववास योग’इस व्रत को और भी ज़्यादा शक्तिशाली बना रहा है’शिववास योग’का अद्भुत संयोग। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार,इस योग में भगवान शिव कैलाश पर अपने वाहन नंदी की सवारी कर रहे होते हैं और बेहद प्रसन्न मुद्रा में होते हैं। माना जाता है कि इस शुभ योग में की गई पूजा-अर्चना कभी खाली नहीं जाती और महादेव अपने भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि भर देते हैं।काम के मुहूर्त (18अक्टूबर, 2025)सूर्योदय:सुबह06:24सूर्यास्त:शाम05:48पूजा का सबसे उत्तम समय (प्रदोष काल):शाम05:48से06:14तकब्रह्म मुहूर्त:सुबह04:43से05:33तकनिशिता मुहूर्त (रात्रि पूजा):रात11:41से12:31तक
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