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मिडिल ईस्ट में बन रहा है एक नया शांति क्लब, 20 और देश इजरायल से हाथ मिलाने को तैयार

News India Live, Digital Desk : एक समय था जब मिडिल ईस्ट के ज्यादातर देश इजरायल का नाम लेना भी पसंद नहीं करते थे, लेकिन अब लगता है कि वक्त की हवा पूरी तरह बदल चुकी है। अमेरिका की एक ताजा रिपोर्ट ने दुनिया भर में, खासकर मुस्लिम देशों में एक नई हलचल पैदा कर दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के करीब 20 और देश इजरायल के साथ अपने रिश्ते सामान्य करने और एक खास ‘शांति पहल’ में शामिल होने के लिए लाइन में लगे हैं।यह पहल पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समय में शुरू हुई थी और अब यह धीरे-धीरे एक बड़ा आकार लेती जा रही है।आखिर क्या है यह ‘शांति पहल’?इस पहल को ‘शांति से समृद्धि’ (Peace to Prosperity) का नाम दिया गया है। इसकी शुरुआत’अब्राहम एकॉर्ड’ (Abraham Accords) से हुई थी। यह वही ऐतिहासिक समझौता था जिसके तहत संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और मोरक्को जैसे प्रमुख अरब देशों ने दशकों पुरानी दुश्मनी को भुलाकर इजरायल के साथ राजनयिक और व्यापारिक संबंध स्थापित किए थे।अब व्हाइट हाउस की रिपोर्ट कह रही है कि इस ‘क्लब’ में शामिल होने वालों की लिस्ट लंबी होती जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, “करीब 20 देश अब इंतजार कर रहे हैं कि वे भी कब अब्राहम एकॉर्ड का हिस्सा बनें।”क्यों मची है इस ‘क्लब’ में शामिल होने की होड़?इसकी वजह सिर्फ शांति नहीं, बल्कि व्यापार और तरक्की है। जो देश इस समझौते का हिस्सा बन रहे हैं, वे आपस में मिलकर व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इससे उनकी अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिल रहा है।इस पहल का एक और बड़ा मकसद है – उन देशों को अलग-थलग करना जो इस क्षेत्र में अस्थिरता और आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यह गठबंधन उन देशों को अलग-थलग कर देगा जो नफरत और संघर्ष का रास्ता अपनाते हैं। संदेश बिल्कुल साफ है: या तो आप शांति और तरक्की के रास्ते पर साथ चलिए, या फिर अकेले पड़ जाइए।हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक इन 20 देशों के नामों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इस खबर ने ही दुनिया की जियो-पॉलिटिक्स में एक नई बहस छेड़ दी है। यह इस बात का संकेत है कि मिडिल ईस्ट की तस्वीर अब वैसी नहीं रहने वाली, जैसी हम आज तक देखते आए हैं