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मीटर लगाने वाली कंपनियां ही कर रहीं जांच, UP में स्मार्ट मीटर पर क्यों गहरा रहा है शक का साया?

News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश में जब से स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर लगने शुरू हुए हैं, तब से एक शिकायत आम हो गई है – “मीटर बहुत तेज भाग रहा है और बिल बहुत ज़्यादा आ रहा है.” प्रदेश के लाखों उपभोक्ता इस समस्या से परेशान हैं. लेकिन अब इस मामले में एक ऐसा पेंच सामने आया है, जिसने इस शक को और भी गहरा कर दिया है. पता चला है कि जिन कंपनियों को आपके घर पर स्मार्ट मीटर लगाने का ठेका दिया गया है, उन्हीं कंपनियों को इन मीटरों की जांच करने की ज़िम्मेदारी भी सौंप दी गई है.यह ठीक वैसा ही है, जैसे किसी चोर को ही तिजोरी की चाबी सौंप दी जाए. इस व्यवस्था ने एक बड़े ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) को जन्म दे दिया है, और अब उपभोक्ता यह सवाल पूछ रहे हैं कि वे अपनी शिकायतों पर भरोसा करें तो किस पर?क्या है पूरा गड़बड़झाला?उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) ने पूरे प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने का काम कुछ बड़ी निजी कंपनियों, जैसे L&T, GMR, अडानी और इन-चार्ज को दिया है. নিয়ম के अनुसार, अगर किसी उपभोक्ता को लगता है कि उसका मीटर तेज चल रहा है, तो वह इसकी शिकायत कर सकता है. शिकायत मिलने पर, बिजली विभाग उस मीटर को उतारकर जांच के लिए भेजता है.लेकिन समस्या यहीं से शुरू होती है. इन मीटरों की जांच के लिए बनाई गई लैब भी इन्हीं निजी कंपनियों द्वारा संचालित की जा रही हैं. यानी, जिस कंपनी ने मीटर लगाया, वही कंपनी यह जांच कर रही है कि मीटर सही है या गलत. ऐसे में कोई भी कंपनी यह कैसे मानेगी कि उसके द्वारा लगाया गया मीटर ख़राब है?थर्ड-पार्टी जांच की उठ रही है मांगइस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी है. उपभोक्ताओं का कहना है कि जब जांच करने वाला और आरोपी एक ही हो, तो निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है? इसी वजह से अब एक स्वतंत्र ‘थर्ड-पार्टी’ से इन मीटरों की जांच कराने की मांग ज़ोर पकड़ रही है. लोगों का कहना है कि सरकार को किसी ऐसी स्वतंत्र एजेंसी को जांच का काम सौंपना चाहिए, जिसका मीटर लगाने वाली कंपनियों से कोई लेना-देना न हो, ताकि जांच की रिपोर्ट पर भरोसा किया जा सके.उपभोक्ता परिषद ने भी उठाए सवालराज्य उपभोक्ता परिषद ने भी इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि यह उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है. जब तक मीटरों की जांच किसी निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी से नहीं कराई जाती, तब तक उपभोक्ताओं के मन में बैठा यह शक दूर नहीं होगा कि उनके साथ धोखा हो रहा है.यह मामला सीधे तौर पर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं की जेब से जुड़ा है. अब देखना यह होगा कि सरकार और पावर कॉरपोरेशन इस ‘हितों के टकराव’ को खत्म करने और उपभोक्ताओं का भरोसा जीतने के लिए क्या कदम उठाते हैं.