
बिहार की राजधानी पटना से लेकर पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों में उस समय सनसनी फैल गई जब प्रदर्शन के दौरान आरजेडी के वरिष्ठ नेता और विधायक तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) को पुलिस ने डिटेन कर लिया। हालांकि पुलिस की हिरासत में जाने के बावजूद तेज प्रताप के तेवर जरा भी ठंडे नहीं पड़े, बल्कि उन्होंने पूरी ताकत के साथ हुंकार भरते हुए कहा कि वे हर हाल में छात्रों के साथ खड़े हैं और उनके अधिकारों के लिए अपनी जान तक देने को तैयार हैं। उनके इस तीखे और आक्रामक तेवर के बाद राज्य का राजनीतिक तापमान सातवें आसमान पर पहुंच गया है और विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है।
आखिर पूरा मामला क्या है और क्यों सड़क पर उतरे थे तेज प्रताप?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र समूहों के समर्थन में तेज प्रताप यादव खुद सड़क पर उतरे थे। छात्रों की समस्याओं और उनकी मांगों को लेकर जब विरोध प्रदर्शन उग्र होने लगा, तो कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने के लिए पुलिस प्रशासन को बीच में दखल देना पड़ा। इसी दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने तेज प्रताप यादव और उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के बाद मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और राजनीतिक माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया।
हिरासत से ही सरकार पर साधा निशाना, छात्रों के हक की उठाई आवाज
पुलिस हिरासत के दौरान मीडिया से बात करते हुए तेज प्रताप यादव ने सरकार और प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने की जितनी भी कोशिश कर ली जाए, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा से युवाओं और छात्रों के साथ खड़ा रहा हूं, उनके हक और अधिकार की इस लड़ाई में अगर मुझे अपनी जान भी देनी पड़े, तो मैं पीछे नहीं हटूंगा।" उनके इस बयान के बाद उनके समर्थकों में भारी जोश देखने को मिला और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी तेज हो गई।
बिहार की राजनीति पर पड़ेगा इसका क्या असर?
तेज प्रताप यादव के इस आक्रामक रुख और डिटेन किए जाने की घटना ने राज्य की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है। आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से इस घटना को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दल और छात्र संगठन इस कार्रवाई के खिलाफ सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं। पुलिस और प्रशासन द्वारा स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके, लेकिन फिलहाल इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने सूबे की सियासत को पूरी तरह से गरमा दिया है।
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