News India Live, Digital Desk: राज्यसभा चुनाव में एनडीए की ‘क्लीन स्वीप’ के बाद महागठबंधन में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस के उन तीन विधायकों में से एक, जिन्होंने वोट नहीं डाला, मनोज विश्वास ने मीडिया के सामने आकर अपनी चुप्पी तोड़ी है।मनोज विश्वास के बयान की मुख्य बातें:नेता का अपमान: मनोज विश्वास ने कहा, “हम जिस दल से आते हैं, उस दल के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम को चुनाव की किसी भी प्रक्रिया या निर्णय में शामिल नहीं किया गया। जब हमारे नेता का ही सम्मान नहीं हुआ, तो हमें वोट देने का कोई अधिकार नहीं है।”राजेश राम का आदेश: विधायक ने दावा किया कि राजेश राम ने सभी छह कांग्रेस विधायकों के साथ बैठक की थी और कहा था कि “आप लोग अपना फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं कि वोट करना है या नहीं।”प्रत्याशी पर सवाल: उन्होंने आरजेडी उम्मीदवार एडी सिंह (अमरेंद्र धारी सिंह) को पसंद न करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि एडी सिंह एक बिजनेसमैन हैं और उन्हें कोई राजनीतिक अनुभव नहीं है। महागठबंधन को ऐसे लोगों को आगे बढ़ाना चाहिए जिनका जमीन पर ‘बेस वोट’ हो।हिना शहाब का जिक्र: मनोज विश्वास ने यह भी कहा कि पहले चर्चा थी कि हिना शहाब या किसी दलित को प्रत्याशी बनाया जाएगा, लेकिन अंत में अचानक एक बिजनेसमैन को टिकट दे दिया गया, जो उन्हें मंजूर नहीं था।गद्दारी के आरोप पर सफाई: उन्होंने कहा, “मैंने दल के साथ गद्दारी नहीं की है। अगर मैं क्रॉस वोटिंग (विपक्ष को वोट देना) करता, तब गद्दारी होती। मैंने केवल प्रत्याशी पसंद न होने के कारण वोटिंग से दूरी बनाई।”कार्रवाई के लिए तैयारपार्टी द्वारा संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई पर मनोज विश्वास ने निडर होकर कहा कि वे किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार हैं। उन्होंने दोहराया कि वे केवल अपने नेता (राजेश राम) के आदेश का पालन कर रहे थे।
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