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वाइल्डलाइफ प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी! कुंभलगढ़ बनेगा देश का 59वां टाइगर रिजर्व, मेवाड़ की वादियों में जल्द गूंजेगी बाघों की दहाड़

वाइल्डलाइफ लवर्स और प्रकृति प्रेमियों के लिए राजस्थान की धरती से एक बेहद गौरवशाली और बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। वीर प्रसूता मेवाड़ की ऐतिहासिक वादियों और जंगलों में एक बार फिर राष्ट्रीय पशु बाघों की दहाड़ गूंजने वाली है। केंद्र सरकार के पर्यावरण और वन मंत्रालय की ओर से कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य (Kumbhalgarh Wildlife Sanctuary) को देश का 59वां और राजस्थान का नया ऑफिशियल टाइगर रिजर्व घोषित करने की दिशा में अंतिम मुहर लगा दी गई है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद मेवाड़ और मारवाड़ की सीमाओं पर फैले इस घने वन क्षेत्र के कायाकल्प का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और राजस्थान वन विभाग ने इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए अपनी तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं।

मेवाड़-मारवाड़ का महासंगम: क्यों खास है कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व?

कुंभलगढ़ का यह नया टाइगर रिजर्व भौगोलिक दृष्टि से बेहद अनूठा और विशाल होने वाला है। यह वन क्षेत्र मुख्य रूप से राजसमंद, उदयपुर और पाली जिलों की सीमाओं को आपस में जोड़ता है। अरावली की प्राचीन पहाड़ियों में बसे इस जंगल का इकोसिस्टम बाघों के रहने, उनके छिपने और शिकार के लिए सबसे अनुकूल माना गया है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस नए टाइगर रिजर्व के कोर और बफर एरिया को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है जिससे यहां रहने वाले पैंथर्स, भालू, और भेड़ियों के साथ-साथ अब रणथंभौर या सरिस्का से शिफ्ट किए जाने वाले बाघों को एक बेहतरीन और सुरक्षित प्राकृतवास मिल सके।

ऐतिहासिक किलों के बीच गूंजेगी दहाड़: बढ़ेगा इको-टूरिज्म

कुंभलगढ़ सिर्फ अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने विश्व प्रसिद्ध कुंभलगढ़ किले और दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार के लिए भी पूरी दुनिया में जाना जाता है। अब यहां टाइगर रिजर्व बनने से इस पूरे इलाके में इको-टूरिज्म (Eco-Tourism) को एक नया और जबरदस्त बूम मिलने वाला है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को अब एक ही जगह पर समृद्ध राजपूत इतिहास, बेजोड़ स्थापत्य कला और घने जंगलों में रॉयल बंगाल टाइगर के दीदार करने का दोहरा रोमांच मिलेगा। स्थानीय गाइडों, होटल व्यवसायियों और हस्तशिल्प कारीगरों के लिए यह फैसला आने वाले समय में रोजगार के अपार अवसर खोलने जा रहा है।

बाघों की शिफ्टिंग और सुरक्षा का मेगा प्लान

कुंभलगढ़ को पूरी तरह से बाघों के अनुकूल बनाने के लिए वन विभाग एक बेहद कड़ा और वैज्ञानिक सुरक्षा खाका तैयार कर रहा है। नए कॉरिडोर में बाघों के शिकार (Prey Base) को बढ़ाने के लिए चीतल, सांभर और जंगली सुआरों की संख्या में इजाफा किया जा रहा है। इसके अलावा, जंगल के भीतर आधुनिक एआई-पावर्ड कैमरों (AI Surveillance) और ड्रोन के जरिए निगरानी रखी जाएगी। इंसानी दखल को कम करने के लिए कुछ गांवों के शांतिपूर्ण और स्वैच्छिक विस्थापन की प्रक्रिया को भी स्थानीय स्तर पर बड़े ही पारदर्शी तरीके से अमलीजामा पहनाया जा रहा है ताकि इंसानों और वन्यजीवों के बीच होने वाले किसी भी संभावित टकराव को पूरी तरह से रोका जा सके।