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‘विदेशी मदद से बने हैं प्रधानमंत्री’: राहुल गांधी का पीएम मोदी पर सीधा हमला

देश की राष्ट्रीय राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला एक नए और आक्रामक मोड़ पर पहुंच चुका है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अब तक का सबसे तीखा और सीधा हमला बोलते हुए दावा किया है कि नरेंद्र मोदी किसी स्वतंत्र लोकतांत्रिक प्रक्रिया मात्र से नहीं, बल्कि विदेशी ताकतों की मदद के सहारे प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत और हमलावर पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार की बुनियाद पर सीधे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सत्ता तंत्र की पूरी वित्तीय व्यवस्था और चुनावी संसाधन विदेशी स्रोतों के नियंत्रण और प्रत्यक्ष समर्थन पर टिके हुए हैं।

कांग्रेस नेता ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों और सोशल मीडिया तंत्र की भूमिका को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके प्रचार तंत्र को एकतरफा समर्थन व संरक्षण प्रदान कर रहे हैं, जिससे देश के भीतर जनमत को प्रभावित किया जाता है। राहुल गांधी ने बिना किसी लाग-लपेट के कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को अब देश की जनता से निरंतर झूठ बोलना बंद कर देना चाहिए। उनके इस सनसनीखेज आरोप के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सियासी गलियारों से लेकर राज्यों तक राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है और दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

'मंच कोई भी हो, समय आप तय करें', राहुल ने पीएम मोदी को दी खुली बहस की चुनौती

अपने हमले को और धार देते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस गंभीर विषय पर सार्वजनिक रूप से आमने-सामने बैठकर खुली बहस करने की सीधी चुनौती दे डाली है। राहुल ने अपनी पोस्ट में ललकारते हुए लिखा कि अगर प्रधानमंत्री अपनी स्थिति को लेकर स्पष्ट हैं, तो वे किसी भी सार्वजनिक मंच पर और अपने मनपसंद समय पर आकर इस मुद्दे पर देश के सामने बहस करें। उन्होंने लिखा, "मिस्टर मोदी, इस देश से झूठ बोलना बंद करें। आप विदेशी मदद से प्रधानमंत्री बने हैं। आपकी वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह से विदेशियों के नियंत्रण और समर्थन में है और विदेशी सोशल मीडिया आपको पूरा समर्थन देता है। मैं आपको इस विषय पर खुली बहस की चुनौती देता हूं। कोई भी मंच हो, कोई भी समय हो, अगर आपमें हिम्मत है तो सामने आइए।"

इसके साथ ही विपक्ष के नेता ने प्रधानमंत्री पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हुए तंज कसा कि वे इस खुली चुनौती को स्वीकार करने का साहस कभी नहीं जुटा पाएंगे। राहुल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री इसलिए डिबेट से बचते हैं क्योंकि वे इस बात से भयभीत हैं कि विपक्ष के पास उनकी कार्यशैली, विदेशी संपर्कों और वित्तीय स्रोतों को लेकर ऐसी जानकारियां मौजूद हैं जो सार्वजनिक होने पर सरकार के लिए असहज स्थितियां पैदा कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति को देश के सवालों का जवाब देने से भागना नहीं चाहिए और यदि लगाए गए आरोप निराधार हैं तो सामने आकर सच को साबित करना चाहिए।

एकता दिवस पर पीएम मोदी का तीखा प्रहार, विपक्ष को बताया था 'अवरोध पक्ष'

राहुल गांधी का यह आक्रामक बयान वास्तव में राष्ट्रीय एकता दिवस के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए एक बेहद कड़े और नीतिगत भाषण की सीधी प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है। सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर आयोजित भव्य समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने विपक्ष की भूमिका की कड़े शब्दों में समीक्षा की थी। पीएम मोदी ने आरोप लगाया था कि आज देश में विपक्ष अपनी सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका से पूरी तरह भटक चुका है। उन्होंने कहा था कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि लोकतंत्र में विरोध पक्ष के रूप में काम करने के बजाय विपक्ष अब एक स्थायी 'अवरोध पक्ष' बनकर रह गया है, जिसका एकमात्र मकसद देश की विकास यात्रा में बाधाएं खड़ी करना है।

प्रधानमंत्री ने अपने उस संबोधन में देश को आंतरिक रूप से बांटने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख को बट्टा लगाने की संगठित साजिशों के खिलाफ देशवासियों को सतर्क रहने की चेतावनी दी थी। पीएम ने रेखांकित किया था कि जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी आर्थिक और सामरिक ताकत का लोहा मनवा रहा है और जटिल बाहरी चुनौतियों का कूटनीतिक समाधान तलाश रहा है, ठीक उसी समय देश के भीतर मौजूद कुछ राजनीतिक ताकतें लगातार झूठ, भ्रम और अफवाहों का सुनियोजित जाल बुनकर देश में अस्थिरता का माहौल पैदा करने में जुटी हुई हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया था कि देश का आम नागरिक इन साजिशों को समझता है और पूरी मजबूती के साथ राष्ट्र निर्माण के पथ पर चट्टान की तरह खड़ा है।

राहुल की विदेश यात्राओं पर परोक्ष निशाना, कौन बोल रहा है देश के दुश्मनों की भाषा?

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना प्रत्यक्ष नाम लिए राहुल गांधी की लगातार होने वाली गुप्त विदेश यात्राओं और विदेशी थिंक टैंक्स के साथ बैठकों पर भी बेहद गंभीर कटाक्ष किया था। पीएम मोदी ने जनसमूह को आगाह करते हुए कहा था कि पिछले एक दशक से अधिक समय से लगातार चुनावी हार झेलने के बाद पैदा हुई राजनीतिक हताशा अब पूरी तरह खुलकर सामने आ चुकी है। हताशा में डूबे ये तत्व अब देश के हितों के साथ समझौता करने पर आमादा दिखाई दे रहे हैं। पीएम ने सवालिया लहजे में पूछा था कि विदेशी धरती पर जाकर कौन लोग किससे गुपचुप मुलाकातें कर रहे हैं और किन अंतरराष्ट्रीय ताकतों के साथ मिलकर देश विरोधी एजेंडे को हवा दी जा रही है?

प्रधानमंत्री ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा था कि देश की जनता को यह बारीकी से देखना और समझना होगा कि भारत-विरोधी ताकतें आज किसका खुलकर समर्थन कर रही हैं और कौन से राजनेता विदेशी मंचों पर खड़े होकर ठीक वही भाषा बोल रहे हैं जो भारत के रणनीतिक दुश्मनों की जुबान पर होती है। उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया को एक मनोवैज्ञानिक हथियार बनाकर आंतरिक अशांति भड़काने के इस अंतरराष्ट्रीय टूलकिट और तौर-तरीकों को पहचानना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री के इसी तीखे हमले ने कांग्रेस आलाकमान को असहज किया, जिसके जवाब में राहुल गांधी ने विदेशी फंडिंग और सोशल मीडिया एल्गोरिदम के संरक्षण का पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है।