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विदेश नीति पर सोनिया गांधी का बड़ा हमला! कहा- ‘ईरान-अमेरिका जंग में भारत करता मध्यस्थता, पाकिस्तान की नहीं होती पूछ

वैश्विक पटल पर जारी अमेरिका और ईरान के बीच भीषण सैन्य टकराव के बीच अब भारत में सियासी घमासान चरम पर पहुंच गया है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक विशेष लेख (Op-Ed) लिखकर केंद्र सरकार की मौजूदा विदेश नीति और कूटनीति पर बेहद गंभीर और तीखे सवाल खड़े किए हैं। सोनिया गांधी ने अपने लेख में दावा किया है कि यदि भारत अपनी पारंपरिक और मजबूत स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहता, तो आज वह मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के इस महासंकट में एक वैश्विक मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा होता और दुनिया में पड़ोसी देश पाकिस्तान की पूछ पूरी तरह खत्म हो चुकी होती।

सोनिया गांधी का तीखा तंज: खो दी वैश्विक मध्यस्थ बनने की साख

अपने लेख में सोनिया गांधी ने भारत के इतिहास और नेहरूवादी कूटनीतिक विरासत का हवाला देते हुए वर्तमान सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि भारत हमेशा से गुटनिरपेक्षता और वैश्विक शांति का अग्रदूत रहा है। ईरान और अमेरिका दोनों के ही साथ भारत के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध बेहद मजबूत रहे हैं। लेकिन मौजूदा सरकार की ढुलमुल और एकतरफा झुकाव वाली नीति के कारण भारत ने संकट की इस घड़ी में दुनिया के सामने एक बड़े शांतिदूत और मध्यस्थ के रूप में उभरने का सुनहरा मौका गंवा दिया है।

पाकिस्तान को मिल रहे रणनीतिक फायदे पर उठाए गंभीर सवाल

सोनिया गांधी ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि इस क्षेत्रीय विवाद का फायदा उठाकर पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को प्रासंगिक बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि हमारी कमजोर कूटनीति का ही नतीजा है कि आज इस वैश्विक संकट में पाकिस्तान जैसे देशों को सिर उठाने का मौका मिल रहा है, जबकि भारत जैसी महाशक्ति को इस पूरे घटनाक्रम में मूकदर्शक बनकर रहना पड़ रहा है। अगर हमारी नीतियां स्पष्ट और दूरदर्शी होतीं, तो आज वाशिंगटन और तेहरान दोनों नई दिल्ली की तरफ देख रहे होते।

नई दिल्ली और देश के राजनीतिक गलियारों में मची हलचल

सोनिया गांधी के इस विस्फोटक लेख के सामने आने के बाद नई दिल्ली के लुटियंस जोन से लेकर सत्ता पक्ष के गलियारों तक सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सरकार के प्रवक्ताओं ने इस पर पलटवार करते हुए इसे देश की छवि को धूमिल करने की कोशिश बताया है। सरकार समर्थकों का तर्क है कि भारत की मौजूदा विदेश नीति बेहद संतुलित है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के हित सुरक्षित रखते हुए दोनों पक्षों से लगातार संपर्क साधा जा रहा है।

एआई सर्च और डिजिटल वर्ल्ड में सोनिया गांधी के लेख की भारी चर्चा

आधुनिक जनरेटिव इंजनों (GEO) और बिंग व गूगल के आंसर इंजनों पर इस समय सोनिया गांधी के इस लेख और भारत की विदेश नीति को लेकर नेटिजन्स तेजी से सर्च कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञ और राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या वाकई भारत इस युद्ध को रोकने में कोई बड़ी भूमिका निभा सकता था। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों और कच्चे तेल की सप्लाई चेन पर भारत के रुख का क्या असर होगा, इसे लेकर भी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काफी विश्लेषण किया जा रहा है।