
News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में हर महीने दो एकादशियां आती हैं और हर एक का अपना अलग महत्व होता है। लेकिन फाल्गुन महीने (जो होली का महीना होता है) में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी कुछ ज्यादा ही खास मानी जाती है। इसे हम ‘आमलकी एकादशी’ के नाम से जानते हैं। कई जगह, खासकर काशी में, इसे ‘रंगभरी एकादशी’ भी कहा जाता है क्योंकि इसी दिन से होली का उत्सव शुरू माना जाता है।अब हम 2025 को अलविदा कहकर जब 2026 की तरफ देख रहे हैं, तो भक्तों के मन में यह सवाल आना लाजमी है कि अगले साल यह पवित्र दिन कब पड़ रहा है?चलिए, बिना किसी कन्फ्यूजन के आसान शब्दों में जानते हैं।तारीख को लेकर ‘गांठ’ बांध लेंपंचांग की गणना के अनुसार, साल 2026 में आमलकी एकादशी 1 मार्च, रविवार को पड़ रही है। रविवार का दिन और भगवान विष्णु का व्रत— यह एक अद्भुत संयोग है।आखिर ‘आमलकी’ ही क्यों?’आमलकी’ का मतलब होता है— आंवला। जी हां, वही आंवला जो सेहत के लिए अमृत है। हमारे शास्त्रों में माना गया है कि आंवले के पेड़ पर स्वयं भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए, इस दिन मंदिर में तो पूजा होती ही है, लेकिन असली पूजा आंवले के पेड़ के नीचे की जाती है।ऐसा माना जाता है कि इस दिन जो भी आंवले के पेड़ के नीचे दिया जलाता है या उसकी परिक्रमा करता है, उसे श्रीहरि की विशेष कृपा मिलती है और अनजाने में हुए पाप कट जाते हैं।2026 में पूजा कैसे करें?इस दिन की तैयारी आपको थोड़ी खास करनी होगी:आंवले का महत्व: पूजा में आंवले का फल जरूर रखें। खुद भी खाएं और प्रसाद के रूप में बांटें। हो सके तो आंवले के पानी से स्नान करें।पीला रंग: भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय है। इसलिए 1 मार्च 2026 को पीले कपड़े पहनना और भगवान को पीले फूल व भोग चढ़ाना बहुत शुभ रहेगा।पेड़ की पूजा: अगर घर के आस-पास आंवले का पेड़ हो, तो वहां जल चढ़ाएं, रोली-मोली बांधें और धूप-दीप दिखाएं।क्या है खास नियम?एकादशी का व्रत सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है। इसका असली नियम है— मन की शुद्धता। इस दिन चावल खाने से परहेज करें। किसी की बुराई न करें और हो सके तो ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप चलते-फिरते करते रहें।तो दोस्तों, 2026 की शुरुआत में ही अपने कैलेंडर में 1 मार्च को मार्क कर लीजिए। यह एकादशी आपके जीवन में सेहत और सुख, दोनों लेकर आए, यही कामना है।
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