
भारतीय क्रिकेट जगत में युवाओं की नई प्रतिभा और उनके सही मार्गदर्शन को लेकर बहस एक बार फिर गरमा गई है। हाल ही में खेले गए मुकाबला के दौरान युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को उनके प्राकृतिक ओपनिंग स्लॉट से हटाकर तीसरे नंबर (Number 3) पर बल्लेबाजी के लिए भेजे जाने पर पूर्व भारतीय दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज दिनेश कार्तिक ने भारी नाराजगी जताई है। दोनों दिग्गज खिलाड़ियों ने टीम प्रबंधन और मुख्य कोच गौतम गंभीर के इस रणनीतिक प्रयोग पर सीधे तौर पर सवाल खड़े किए हैं।
अश्विन ने बेहद तीखे लहजे में कहा कि पिच पर तीसरे नंबर पर उतरने के बाद वैभव मैदान में 'बिना पानी की मछली' की तरह नजर आ रहे थे और उनका सहज स्वाभाविक खेल पूरी तरह से प्रभावित हुआ। एक अनुभवी खेल पत्रकार के नजरिए से देखें तो भारतीय ड्रेसिंग रूम की यह नई रणनीति युवाओं के आत्मविश्वास को मजबूत करने के बजाय उनके स्वाभाविक टैलेंट को दबाती हुई नजर आ रही है, जिसे लेकर अब सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट के दिग्गजों के बीच हलचल मच गई है।
अश्विन और दिनेश कार्तिक ने कोच गौतम गंभीर की रणनीति को बताया गलत
मैच के बाद अपने यूट्यूब चैनल और स्पोर्ट्स शो के दौरान आर. अश्विन और दिनेश कार्तिक ने खुलकर टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर की बैटिंग ऑर्डर प्लानिंग को निशाने पर लिया। अश्विन ने कहा कि जब कोई युवा बल्लेबाज घरेलू या जूनियर स्तर पर ओपनिंग में अपने विस्फोटक अंदाज से पहचान बनाता है, तो अंतरराष्ट्रीय या दबाव वाले मैचों में उसके साथ इस तरह का प्रयोग करना उसके करियर को जोखिम में डालना है।
दिनेश कार्तिक ने भी अश्विन के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करना एक अलग मानसिक और तकनीकी क्षमता की मांग करता है। नए बल्लेबाज को क्रीज पर आकर तुरंत इनिंग्स बिल्ड करनी होती है, जबकि ओपनर के रूप में खिलाड़ी के पास पावरप्ले का फायदा उठाने का मौका होता है। कार्तिक का मानना है कि कोच गंभीर को युवा खिलाड़ियों के स्वाभाविक बैटिंग पोजीशन से खिलवाड़ करने से बचना चाहिए ताकि उनके विकास में कोई रुकावट न आए।
क्रीज पर असहज दिखे वैभव सूर्यवंशी: पावरप्ले के उपयोग से हुए वंचित
इस मुकाबले में जब भारत का पहला विकेट जल्दी गिरा और वैभव सूर्यवंशी तीसरे नंबर पर मैदान में उतरे, तो उनकी बॉडी लैंग्वेज से ही स्पष्ट हो रहा था कि वे इस नई भूमिका में सहज नहीं हैं। जो खिलाड़ी पहली ही गेंद से आक्रामक शॉट खेलने के लिए जाना जाता है, वह शुरुआती कुछ गेंदों पर गेंद को टाइम करने और स्ट्राइक रोटेट करने में संघर्ष करता दिखा।
गेंदबाजों ने उनकी इस हिचकिचाहट का पूरा फायदा उठाया और उन्हें स्टंप की सीधी लाइन में बांधकर रखा। नतीजा यह हुआ कि वैभव बिना कोई बड़ा प्रभाव छोड़े गैर-जिम्मेदाराना शॉट खेलकर पवेलियन लौट गए। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि जब किसी युवा खिलाड़ी को उसकी अनुकूल जगह पर मौका नहीं दिया जाता, तो उस पर गैर-जरूरी मानसिक दबाव बनता है जिसका असर उसकी तकनीक और आत्मविश्वास दोनों पर पड़ता है।
कोच गौतम गंभीर के प्रयोगों पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच बनने के बाद से गौतम गंभीर की कोचिंग शैली और लगातार बैटिंग ऑर्डर में किए जा रहे बदलावों की काफी चर्चा हो रही है। इससे पहले भी कई मैचों में ऑलराउंडरों और बल्लेबाजों के क्रम को बार-बार बदलने को लेकर पूर्व खिलाड़ियों ने आपत्ति जताई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि टी20 और वनडे फॉर्मेट में फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलापन) जरूरी है, लेकिन जब बात 13-14 साल के रिकॉर्ड बनाने वाले उभरते खिलाड़ियों की हो, तो उन्हें एक निश्चित रोल दिया जाना चाहिए। बार-बार स्थान बदलने से युवा खिलाड़ी यह समझ नहीं पाते कि उनसे टीम क्या चाहती है और वे अपनी स्वाभाविक आक्रामकता खो बैठते हैं।
भविष्य के दौरों के लिए बैटिंग ऑर्डर में स्थिरता की मांग
अश्विन और कार्तिक के इस कड़े बयान के बाद अब टीम इंडिया के थिंक टैंक पर दबाव बढ़ गया है कि वे आगामी सीरीजों में बल्लेबाजी क्रम में स्थिरता लाएं। वैभव सूर्यवंशी जैसे उभरते हुए सितारों को भारत का भविष्य माना जा रहा है, ऐसे में उन्हें उनके पसंदीदा ओपनिंग स्लॉट पर खिलाना ही भारतीय क्रिकेट के हित में होगा।
फैंस और पूर्व खिलाड़ियों ने उम्मीद जताई है कि आगामी मैचों में कोच गंभीर और कप्तान इस मामले में पुनर्विचार करेंगे और वैभव को पारी की शुरुआत करने का पूरा मौका देंगे ताकि वह बिना किसी दबाव के अपनी आक्रामक बल्लेबाजी का जलवा दिखा सकें।
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