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शनि की साढ़ेसाती ने नाक में दम कर रखा है? हनुमान जी की ये 8 पंक्तियाँ तुरंत दिखाती हैं असर

News India Live, Digital Desk : हम सबकी ज़िंदगी में एक ऐसा दौर जरूर आता है जब लगता है कि मुश्किलें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहीं। कभी बीमारी, कभी पैसों की तंगी, तो कभी बनता हुआ काम बिगड़ जाना। कई बार तो हमें लगता है कि शायद ग्रहों की चाल या शनि (Shani) की बुरी नजर हम पर पड़ गई है।अगर आप भी ऐसे ही किसी दौर से गुजर रहे हैं, जहाँ समझ नहीं आ रहा कि क्या करें, तो घबराने की जरूरत नहीं है। हमारे धर्म शास्त्रों में गोस्वामी तुलसीदास जी ने एक ऐसा ‘कवच’ हमें दिया है, जो बड़े से बड़े पहाड़ को भी राई बना सकता है। जी हाँ, मैं बात कर रहा हूँ ‘संकट मोचन हनुमानाष्टक’ (Sankat Mochan Hanuman Ashtak) की।आइये, आसान भाषा में समझते हैं कि यह पाठ इतना खास क्यों है और इसे करने से आपकी ज़िंदगी में क्या बदलाव आ सकता है।हनुमान चालीसा और हनुमानाष्टक में फर्क क्या है?अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि हम हनुमान चालीसा तो पढ़ते ही हैं, फिर अष्टक क्यों? देखिये, चालीसा हनुमान जी के गुणों का बखान है, लेकिन ‘हनुमानाष्टक’ एक पुकार है। जब आप मुसीबत में फंस जाते हैं और कोई रास्ता नहीं मिलता, तब इस पाठ के जरिये आप बजरंगबली को याद दिलाते हैं कि “हे प्रभु! आपने तो बचपन में सूर्य को निगल लिया था, आपने लक्ष्मण जी की जान बचाई थी, मेरे छोटे से संकट को दूर करना आपके लिए क्या बड़ी बात है?”इस पाठ की हर पंक्ति में हनुमान जी के उस बल का जिक्र है जो उन्होंने अपने भक्तों के लिए दिखाया था।शनि के प्रकोप का अचूक इलाजज्योतिष के जानकार भी मानते हैं कि जिस व्यक्ति पर हनुमान जी का हाथ हो, उसका शनि, राहु या केतु कुछ नहीं बिगाड़ सकते। खास तौर पर अगर आपकी कुंडली में शनि भारी है या ‘साढ़ेसाती’ चल रही है, तो हनुमानाष्टक का पाठ किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है।तुलसीदास जी ने खुद लिखा है “को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो।” यानी दुनिया में कौन नहीं जानता कि आपका नाम ही संकट मोचन (मुसीबतों को हरने वाला) है।पाठ करने का सही और आसान तरीकाइसके लिए आपको किसी बड़े कर्मकांड की जरूरत नहीं है, बस मन साफ़ होना चाहिए।दिन: मंगलवार (Tuesday) और शनिवार (Saturday) का दिन इसके लिए सबसे उत्तम माना गया है।माहौल: सुबह या शाम के वक्त नहा-धोकर हनुमान जी की तस्वीर के सामने बैठें। हो सके तो चमेली के तेल (Jasmine Oil) का दीपक जलाएं, हनुमान जी को यह बहुत प्रिय है।समर्पण: पूरे भाव से “बाल समय रवि भक्षी लियो…” से शुरू होने वाले इस अष्टक का पाठ करें। इसे पढ़ते समय महसूस करें कि आपकी परेशानी हनुमान जी सुन रहे हैं।मन की शांति और डर से मुक्तिसिर्फ ग्रहीय दोष ही नहीं, अगर आपके मन में किसी बात का अनजाना डर है या आत्मविश्वास की कमी है, तो कुछ दिन लगातार इस पाठ को करके देखें। आपको अपने अंदर एक अलग ही ऊर्जा महसूस होगी। यह पाठ हमें सिखाता है कि जब रक्षक खुद महावीर हों, तो डरने की कोई बात नहीं।तो दोस्तों, अगर ज़िंदगी उलझ गई है, तो बस विश्वास के साथ ‘संकट मोचन’ की शरण में चले जाइये, रास्ता अपने आप निकल आएगा।