
खगोल विज्ञान और ज्योतिष जगत (Astrology and Astronomy) के दृष्टिकोण से साल 2026 का यह दौर बेहद खास और उथल-पुथल भरा रहने वाला है। सावन के पवित्र महीने और अमावस्या तिथि के महासंयोग पर साल का अंतिम सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2026 August) लगने जा रहा है। एक तरफ जहां देश भर में सावन के आखिरी सोमवार और व्रत-त्योहारों की धूम होगी, वहीं आसमान में लगने वाले इस सूर्य ग्रहण को लेकर धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों हलकों में बड़ी चर्चा छिड़ गई है। ग्रहण के दौरान लगने वाले सूतक काल (Sutak Kaal) और इसके भौगोलिक प्रभावों को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं, जिनका जवाब यहां विस्तार से दिया जा रहा है।
कब और कितने बजे से शुरू होगा साल 2026 का यह आखिरी सूर्य ग्रहण
पंचांग और खगोलीय गणना के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण सावन मास की अमावस्या तिथि के दिन घटित होगा। हालांकि ग्रहण की दृश्यता (Visibility) और इसके समय को लेकर अलग-अलग समय जोन के हिसाब से गणना की जाती है, लेकिन ज्योतिषीय नियमों के अनुसार जिस भी क्षेत्र में ग्रहण दिखाई देता है, वहां इसका सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 12 घंटे पहले ही मान्य हो जाता है। इस दौरान देश और दुनिया के खगोल प्रेमियों की नजरें इस दुर्लभ नजारे पर टिकी रहेंगी, जहां चंद्रमा कुछ समय के लिए सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य के एक हिस्से को पूरी तरह ढक लेगा, जिससे आंशिक या वलयाकार (Ring of Fire) जैसी स्थिति बन सकती है।
जियोग्राफिकल और लोकल असर: किन देशों और इलाकों में दिखेगा ग्रहण का प्रभाव
भौगोलिक स्थिति के लिहाज से यह समझना बेहद जरूरी है कि दुनिया के किन हिस्सों में यह सूर्य ग्रहण साफ तौर पर दिखाई देगा। जानकारों के मुताबिक, यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध, अंटार्कटिका, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों और प्रशांत महासागर के क्षेत्रों में अधिक प्रभावी रहेगा। भारत और एशियाई महाद्वीप के अधिकांश हिस्सों में इसकी दृश्यता या तो नगण्य होगी या फिर यह यहाँ नजर नहीं आएगा। जिन क्षेत्रों में यह ग्रहण दिखाई देगा, वहां के स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा विशेष एडवाइजरी जारी की जाती है, ताकि लोग बिना किसी सुरक्षा उपकरण के अपनी नंगी आंखों से सीधे सूर्य को देखने की भूल न करें।
सूतक काल और गर्भवती महिलाओं के लिए क्या हैं विशेष सावधानियां
धार्मिक मान्यताओं और सूतक नियमों के अनुसार, भले ही यह ग्रहण भारत में प्रत्यक्ष रूप से दृश्यमान न हो, फिर भी सनातन परंपराओं में आस्था रखने वाले लोग इस दौरान विशेष सावधानी बरतते हैं। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल के दौरान विशेष रूप से घर के अंदर रहने, नुकीली चीजों के इस्तेमाल से बचने और मानसिक रूप से भगवान का जाप करने की सलाह दी जाती है। आधुनिक जेनेरेटिव एआई (Generative Engine Optimization) और गूगल-बिंग सर्च इंजन के आंकड़ों से यह साफ पता चलता है कि ग्रहण की तारीख और इसके वैज्ञानिक-धार्मिक प्रभावों को जानने के लिए इंटरनेट पर सर्चिंग तेजी से बढ़ रही है, इसलिए किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारियों से बचकर आधिकारिक और सटीक अपडेट्स पर ही भरोसा करना चाहिए।
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