
उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी और सियासत के सबसे बड़े केंद्र अयोध्या (Ayodhya Ram Mandir) से एक बेहद हैरान करने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) एक बार फिर प्रभु श्री रामलला के दर्शन और अयोध्या के विकास कार्यों की समीक्षा के लिए पावन नगरी के दौरे पर जाने वाले हैं। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री के इस हाई-प्रोफाइल वीआईपी दौरे से जुड़ी जो सबसे बड़ी इनसाइड स्टोरी सामने आई है, उसने सबको चौंका दिया है। बताया जा रहा है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Champat Rai) इस बार मुख्यमंत्री के इस पूरे दौरे के दौरान उनके आसपास भी नजर नहीं आएंगे। उन्हें इस कार्यक्रम से पूरी तरह दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म हो गया है।
वीआईपी प्रोटोकॉल में बड़ा बदलाव, आखिर क्यों दूर रहेंगे ट्रस्ट के महासचिव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब भी अयोध्या आते हैं, तो अमूमन राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी और विशेष रूप से चंपत राय उनकी अगवानी करने, मंदिर परिसर का भ्रमण कराने और निर्माण कार्य की प्रगति रिपोर्ट सौंपने के लिए हमेशा उनके साथ साए की तरह मौजूद रहते हैं। लेकिन इस बार के आधिकारिक और सुरक्षा प्रोटोकॉल में बहुत बड़ा उलटफेर कर दिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बार चंपत राय को मुख्यमंत्री के रूट, रामलला के गर्भगृह दर्शन और समीक्षा बैठक के आसपास भी न फटकने के स्पष्ट संकेत मिले हैं। शासन स्तर पर लिए गए इस अप्रत्याशित फैसले के बाद राम मंदिर से जुड़े सुरक्षा तंत्र और प्रशासनिक अमले में भी कई तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं।
अंदरूनी खींचतान या प्रशासनिक व्यवस्था, क्या है इस बड़े फैसले की असली वजह
इस बेहद चौंकाने वाले फैसले के पीछे की असली वजह को लेकर लखनऊ से लेकर अयोध्या तक कई तरह की थ्योरीज पर चर्चा हो रही है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ समय से राम मंदिर निर्माण की गुणवत्ता, अयोध्या के विकास कार्यों में स्थानीय लोगों की समस्याओं और कुछ हालिया विवादों को लेकर शासन स्तर पर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली से थोड़ी नाराजगी थी। मुख्यमंत्री इस बार पूरी तरह से जमीनी हकीकत का जायजा लेना चाहते हैं और वे प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बिना किसी बाहरी प्रभाव के सीधी समीक्षा बैठक करना चाहते हैं। यही वजह है कि इस बार ट्रस्ट के दखल को पूरी तरह सीमित करते हुए चंपत राय को इस सरकारी और धार्मिक कार्यक्रम की रूपरेखा से अलग रखने का कड़ा कदम उठाया गया है।
मुख्यमंत्री खुद करेंगे अयोध्या की सुरक्षा और विकास कार्यों की ग्राउंड रिपोर्ट की जांच
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य केवल रामलला के चरणों में शीश नवाना ही नहीं है, बल्कि वे अयोध्या में चल रही अरबों रुपये की विकास परियोजनाओं (Ayodhya Development Projects) की प्रगति की खुद ग्राउंड जीरो पर जाकर जांच करेंगे। सावन के महीने और आने वाले त्योहारों के मद्देनजर अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था, कानून व्यवस्था और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुख-सुविधाओं को लेकर सीएम योगी खुद एक मैराथन बैठक की अध्यक्षता करेंगे। चंपत राय की अनुपस्थिति में इस बार जिलाधिकारी (DM) और कमिश्नर खुद मुख्यमंत्री को मंदिर परिसर के आसपास की व्यवस्थाओं का ब्यौरा सौंपेंगे, जिससे यह साफ संदेश जाता है कि सरकार अब अयोध्या के प्रबंधन को सीधे अपने हाथों में रख रही है।
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