Thursday , June 18 2026

सुप्रीम कोर्ट : वकील की बात सुन सीजेआई सूर्यकांत बोले- ‘क्या किसी ज्योतिषी ने कहा है?’, ठहाकों से गूंजा कोर्ट रूम

देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) से अक्सर गंभीर कानूनी बहसों और बड़े फैसलों की खबरें सामने आती हैं, लेकिन कभी-कभी कोर्ट रूम के भीतर कुछ ऐसे पल भी आते हैं जो वहां मौजूद सभी लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला देते हैं। ऐसा ही एक बेहद दिलचस्प और मजेदार वाकया देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अदालत में देखने को मिला। एक मामले की लाइव सुनवाई के दौरान जब एक वकील साहब ने जज के सामने अपनी एक अनोखी और जिद भरी मांग रख दी, तो खुद सीजेआई भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। उन्होंने वकील की मांग पर ऐसी हाजिरजवाबी दिखाई कि पूरा कोर्ट रूम ठहाकों से गूंज उठा।

जानिए क्या थी वकील साहब की वह अनोखी मांग

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब अदालत के सामने एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई चल रही थी। अपनी दलीलें पूरी करने के बाद वकील साहब ने बेंच से आग्रह किया कि उनके इस मामले की अगली सुनवाई को एक विशेष तारीख या दिन पर ही फिक्स किया जाए। उन्होंने अदालत से तारीख को लेकर काफी जिद की, जो कि सामान्य अदालती प्रक्रिया में काफी असामान्य माना जाता है। वकील की इस अजीबोगरीब मांग और तारीख को लेकर उनकी खास जिद को देखकर पीठ के सभी जज हैरान रह गए। वकील साहब अपनी बात पर इस तरह अड़े थे जैसे उस खास तारीख के अलावा किसी और दिन सुनवाई होने से उनके केस पर कोई बड़ा असर पड़ जाएगा।

सीजेआई सूर्यकांत की हाजिरजवाबी और कोर्ट रूम में ठहाके

वकील साहब की इस डिमांड को सुनते ही मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने तुरंत कमान संभाली और बेहद मजाकिया लहजे में वकील से पूछा, "क्या आपको किसी ज्योतिषी (Astrologer) ने इस खास तारीख पर ही सुनवाई कराने की सलाह दी है?" सीजेआई का यह इतना कहना था कि अदालत कक्ष में मौजूद सभी वरिष्ठ वकील, सॉलिसिटर जनरल और कोर्ट स्टाफ अपनी हंसी नहीं रोक पाए। इस हल्के-फुल्के तंज ने कोर्ट रूम के तनावपूर्ण माहौल को पूरी तरह से खुशनुमा बना दिया। वकील साहब भी सीजेआई की इस बात पर मुस्कुराए बिना नहीं रह सके और उन्होंने माना कि अदालती तारीखें ज्योतिषीय गणना से नहीं बल्कि कोर्ट के कैलेंडर और केसों की पेंडेंसी के आधार पर तय होती हैं।

कड़े कानूनी माहौल के बीच क्यों जरूरी हैं ऐसे हल्के-फुल्के पल

सुप्रीम कोर्ट के वकीलों और जजों के बीच होने वाली यह मजेदार नोकझोंक इस समय सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हो रही है। कानूनी जानकारों का कहना है कि हर दिन सैकड़ों पेचीदा मुकदमों, संवैधानिक मामलों और गंभीर अपराधों की सुनवाई के कारण जजों और वकीलों पर मानसिक दबाव बहुत अधिक होता है। ऐसे में कोर्ट रूम के भीतर होने वाले ये छोटे और खुशनुमा संवाद न केवल जजों के काम के तनाव को कम करते हैं, बल्कि बार और बेंच (Bar and Bench) के बीच के रिश्तों को भी एक नई सहजता और मजबूती प्रदान करते हैं। सीजेआई सूर्यकांत की इस हाजिरजवाबी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि न्याय की कुर्सी पर बैठे लोग भी मानवीय संवेदनाओं और हास्य-विनोद को बखूबी समझते हैं।