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‘स्वतंत्रता केवल मनमर्जी करने की आजादी नहीं’, युवाओं को पुणे में NSA अजीत डोभाल का बड़ा संदेश

महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित एक गरिमामयी लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने देश के युवाओं को राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित रहने का अनमोल संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश इस समय इतिहास के एक बेहद असाधारण दौर से गुजर रहा है, जहाँ युवाओं को अपने निजी और संकीर्ण हितों को दरकिनार कर केवल और केवल देशहित को सर्वोपरि रखना चाहिए। डोभाल ने इस समय को भारत के लिए 'एक अवसर की खिड़की' बताते हुए कहा कि हमें इस ऐतिहासिक मौके को किसी भी कीमत पर जाने नहीं देना चाहिए।

'निजी हित इंतजार कर सकते हैं, राष्ट्र निर्माण है हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता'

अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए एनएसए अजीत डोभाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि युवाओं के व्यक्तिगत और निजी हित अभी कुछ समय के लिए इंतजार कर सकते हैं, लेकिन देश का उत्थान और राष्ट्र निर्माण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि आज भारत के सामने जो असाधारण अवसर आया है, उसे गँवाने का जोखिम हम नहीं उठा सकते। देश का प्रत्येक युवा अगर पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ आगे बढ़े, तो हम मिलकर इतिहास का एक नया और स्वर्णिम अध्याय लिख सकते हैं।

स्वतंत्रता का गलत अर्थ निकाल रही नई पीढ़ी, बलिदानों को रखें याद

आज की युवा पीढ़ी द्वारा स्वतंत्रता के मतलब को लेकर एनएसए डोभाल ने एक बड़ी और विचारणीय बात कही। उन्होंने कहा कि कई बार युवाओं को यह गलतफहमी हो सकती है कि भारत हमेशा से ऐसा ही था जैसा वे आज देख रहे हैं। नई पीढ़ी यह मान बैठती है कि स्वतंत्रता का अर्थ केवल वही करना है जो मन में आए। इस भ्रम को दूर करते हुए डोभाल ने चेताया कि यह सोच बिल्कुल गलत है। आज हम जिस खुली हवा में सांस ले रहे हैं और जो आजादी महसूस कर रहे हैं, वह हमें मुफ्त में नहीं मिली, बल्कि इसके लिए देश की कई पुरानी पीढ़ियों ने अपने प्राणों की आहुति दी है।

लोकमान्य तिलक के नारे को नए दौर में ढालकर युवाओं में भरा जोश

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक लोकमान्य तिलक के योगदान को याद करते हुए अजीत डोभाल ने कहा कि तिलक ने अपने दौर की युवा शक्ति के भीतर राष्ट्रभक्ति का जो संचार किया था, वह आज भी प्रासंगिक है। डोभाल ने कल्पना करते हुए कहा कि अगर आज लोकमान्य तिलक हमारे बीच होते, तो शायद उनका नारा होता- "भारत को मजबूत और विकसित बनाना मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे पूरा करके रहूंगा। मुझे इस राष्ट्र को शक्तिशाली बनाने के लिए अपनी अंतिम सांस तक जो भी करना पड़े, मैं करूंगा।" उन्होंने तिलक के प्रसिद्ध नारे "स्वाधीनता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है" का जिक्र कर युवाओं को प्रेरित किया।

'जो देश के हित में नहीं, वह हमारे हित में भी नहीं हो सकता'

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने अंत में युवाओं को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि व्यक्तिगत लक्ष्य या जीवन के अन्य उद्देश्य अपने आप में गलत नहीं होते हैं, लेकिन उनका दायरा राष्ट्रहित के दायरे से बाहर नहीं जाना चाहिए। डोभाल ने स्पष्ट किया कि चाहे हमारा कोई निजी लाभ हो, या फिर किसी शहर, गांव या राज्य का हित, यदि वह देश के व्यापक राष्ट्रीय हितों के विपरीत है, तो वह हमारे लिए भी हितकर नहीं हो सकता। राष्ट्रहित से ऊपर कुछ भी नहीं है और हर युवा के मन में यही मुख्य भावना होनी चाहिए।