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हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों से टोल टैक्स वसूलेगा ईरान? खाड़ी देशों में नया संकट, जानें क्या है अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून

News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक ऐसा कदम उठाने के संकेत दिए हैं जिससे वैश्विक व्यापारिक जगत में हड़कंप मच गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी संसद में एक नया बिल पेश किया गया है, जिसके तहत दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से ‘टोल’ या सुरक्षा शुल्क वसूलने की योजना बनाई जा रही है। अगर यह कानून लागू होता है, तो अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन की लागत में भारी इजाफा हो सकता है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर पड़ेगा।ईरान का तर्क: ‘सुरक्षा हम दे रहे, तो खर्च भी दुनिया उठाए’ईरानी सांसदों का कहना है कि ईरान इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भारी निवेश करता है और खाड़ी देशों को स्थिरता प्रदान करता है। ईरानी संसद के सदस्य मोहम्मद हसैन अवाजेह के अनुसार, अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बीच ईरान को अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा का खर्च वहन करना पड़ रहा है। ऐसे में जो देश ईरान के जल क्षेत्र या उसके प्रभाव वाले मार्ग का उपयोग करते हैं, उन्हें इसके बदले में शुल्क देना चाहिए। ईरान का लक्ष्य उन जहाजों से कर वसूलना है जो उन देशों के हैं जिन्होंने ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों का समर्थन किया है।क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS)?ईरान की इस योजना पर कानून विशेषज्ञों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के अनुसार, किसी भी जलडमरूमध्य का उपयोग अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए ‘ट्रांजिट पैसेज’ (Transit Passage) के अधिकार के तहत किया जा सकता है।मुक्त मार्ग का अधिकार: अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण जलमार्गों से गुजरने वाले जहाजों को किसी भी देश द्वारा तब तक नहीं रोका जा सकता या उन पर टैक्स नहीं लगाया जा सकता, जब तक कि वे उस देश की सुरक्षा के लिए खतरा न हों।ईरान का स्टैंड: हालांकि, ईरान ने UNCLOS संधि पर हस्ताक्षर तो किए हैं, लेकिन इसकी पुष्टि (Ratification) नहीं की है। ईरान का दावा है कि हॉर्मुज का बड़ा हिस्सा उसके प्रादेशिक जल क्षेत्र (Territorial Waters) में आता है, इसलिए उसे वहां के नियम तय करने का अधिकार है।दुनिया भर में तेल संकट की आशंका: भारत पर पड़ेगा बड़ा असरहॉर्मुज जलडमरूमध्य कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे देशों का तेल निर्यात इसी संकरे रास्ते पर निर्भर है। यदि ईरान यहां टोल वसूलना शुरू करता है या जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करता है, तो भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा का संकट खड़ा हो जाएगा। इससे न केवल पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) भी पूरी तरह से चरमरा सकती है।