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24 गांवों की जमीन पर बसेगा ‘नया गोरखपुर’! सिंगापुर की तर्ज पर बनेगी ‘गुरुकुल सिटी’, पर मुआवजे पर फंसा पेंच

गोरखपुर अब सिर्फ एक शहर नहीं,बल्कि एक नए भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है। शहर को एक आधुनिक और व्यवस्थित रूप देने के लिए’नया गोरखपुर’नाम का एक विशालकाय प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इस ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत, ‘गुरुकुल सिटी’नाम से एक पूरी टाउनशिप विकसित की जाएगी,जो गोरखपुर का चेहरा हमेशा के लिए बदल कर रख देगी।लेकिन इस बड़े सपने के रास्ते में एक बड़ी चुनौती भी है- जमीन अधिग्रहण पर किसानों का विरोध।कैसा होगा यह’नया गोरखपुर’?इस प्रोजेक्ट की आत्मा है’गुरुकुल टाउनशिप’। यह सिर्फ कुछ इमारतें नहीं,बल्कि एक छोटा-सा आधुनिक शहर होगा,जिसमें आम लोगों के लिए हर सुविधा मौजूद होगी:आधुनिक आवास:ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियां,प्लॉट्स,और गरीबों के लिएEWS/LIGआवास।कमर्शियल हब:होटल,शॉपिंग मॉल और बड़े-बड़े रिटेल स्टोर।शिक्षा और स्वास्थ्य:बड़े स्कूल-कॉलेज,ट्रेनिंग सेंटर और अस्पताल।अन्य सुविधाएं:सिटी सिविक सेंटर,पार्क,झीलें और चौड़ी-चौड़ी सड़कें।जमीन कहां से आएगी और पेंच कहां फंसा है?इस विशाल प्रोजेक्ट के लिएGIDA (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) ने कुल24गांवोंकी जमीन कोचिह्नित किया है।अब तक क्या हुआ:अब तक3गांवों (मानीराम,रहमतनगर,बालापार) मेंलगभग210एकड़ जमीन किसानों की सहमति सेखरीदी जा चुकी है।आगे क्या होगा:लेकिन प्रोजेक्ट के लिए यह जमीन काफी नहीं है। इसलिए अब चौरीचौरा और सदर तहसील के कई गांवों की सैकड़ों एकड़ जमीन काअनिवार्य अधिग्रहण (Compulsory Acquisition)किया जाएगा।यहीं पर मामला फंसा है!किसान सरकार द्वारा दी जा रही मुआवजे की दरों से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि उन्हें उनकी जमीन का सही दाम नहीं मिल रहा।किसानों की मांग:किसानों की मांग है कि पहले जमीन के सर्किल रेट को आज के बाज़ार भाव के हिसाब से ठीक किया जाए,और फिरउसका चार गुना मुआवजादिया जाए।सरकार का पक्ष: GIDAके अधिकारी लगातार किसानों से बातचीत कर रहे हैं,लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।विरोध के बावजूद काम जारीकिसानों के विरोध के बावजूद, GIDAइस प्रोजेक्ट को लेकर आगे बढ़ रहा है।’गुरुकुल टाउनशिप’के फेज-1के लिए नक्शे को मंजूरी मिल चुकी है और लगभग200एकड़ जमीन पर कब्ज़ा लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।GIDAके उपाध्यक्ष आनंद वर्धन ने भरोसा दिलाया है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता रखी जाएगी और किसानों के हितों का भी ध्यान रखा जाएगा।यह प्रोजेक्ट गोरखपुर के विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है,जो हजारों लोगों को घर और रोजगार देगा। हालांकि,इस विकास की राह तभी आसान होगी,जब किसानों के हितों और शहर के भविष्य के बीच एक सही संतुलन बनाया जाएगा।