
केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच इन दिनों '8वें वेतन आयोग' (8th Pay Commission) को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। आयोग के गठन को 9 महीने से अधिक का समय बीत चुका है और इस दौरान विभिन्न कर्मचारी संगठनों के साथ देश के अलग-अलग शहरों में कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इसी कड़ी में इसी महीने 8 और 10 अगस्त को दिल्ली में अहम बैठकें आयोजित की गईं। जैसे-जैसे आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, कर्मचारियों की उम्मीदें और माँगे भी लगातार परवान चढ़ती जा रही हैं।
फिटमेंट फैक्टर और 69,000 रुपये बेसिक पे की मांग
8वें वेतन आयोग के सामने सबसे बड़ी और मुखर मांग 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) को लेकर उठाई जा रही है। दिल्ली में हुई हालिया बैठकों के दौरान कर्मचारी संगठनों ने आयोग के समक्ष 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की जोरदार मांग रखी है। यदि सरकार इस मांग को स्वीकार कर लेती है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में जबरदस्त उछाल आएगा और यह बढ़कर सीधे 69,000 रुपये तक पहुंच सकती है। बता दें कि बेसिक पे में बढ़ोतरी पूरी तरह से तय किए जाने वाले फिटमेंट फैक्टर के गुणांक पर ही निर्भर करेगी।
फैमिली यूनिट और HRA में बदलाव का प्रस्ताव
बेसिक सैलरी के अलावा कर्मचारियों से जुड़े संगठनों ने कुछ अन्य बुनियादी बदलावों की भी पुरजोर मांग की है। वर्तमान व्यवस्था के तहत 'फैमिली यूनिट' (Family Unit) की संख्या 3 मानी जाती है, जिसे बढ़ाकर 5 करने का प्रस्ताव दिया गया है। संगठनों का तर्क है कि आधुनिक सामाजिक ढांचे को देखते हुए इसमें माता-पिता को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा, दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में रहने वाले कर्मचारियों के लिए मौजूदा हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाने की मांग की गई है। महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी दिलचस्प सुझाव आए हैं, जिसमें कुछ संगठनों ने साल में 4 बार डीए बढ़ाने और डीए 25% तक पहुंचने पर उसे बेसिक सैलरी में मर्ज करने की अपील की है।
पहले कितने रुपये थी न्यूनतम बेसिक सैलरी?
इतिहास पर नजर डालें तो वेतन आयोगों के जरिए कर्मचारियों के वेतनमान में लगातार सुधार होते रहे हैं। पहले वेतन आयोग की रिपोर्ट (1946-47) लागू होने पर न्यूनतम बेसिक पे मात्र 55 रुपये थी। दूसरे आयोग के बाद यह बढ़कर 80 रुपये, तीसरे के बाद 196 रुपये और 7वें वेतन आयोग के लागू होने पर यह 18,000 रुपये तक पहुंच गई थी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 8वां वेतन आयोग क्या सिफारिशें लेकर आता है।
कब आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट?
केंद्र सरकार ने पिछले साल नवंबर में 8वें वेतन आयोग का गठन किया था। नियमानुसार आयोग के पास कुल 18 महीने का समय होता है। इसके तहत आयोग को मई 2027 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपनी होगी। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद ही सरकार इन सिफारिशों पर आधिकारिक मुहर लगाएगी, जिसका इंतजार देश के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को है।
UK News