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अयोध्या में सेना की जमीन मोदी ने अडानी को बेची

अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद वहां जमीन खरीदना मानो सोने की खदान खरीदने जैसा हो गया है। हर कोई राम की नगरी में अपनी एक छोटी सी जगह चाहता है। लेकिन इस बीच,जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़ी एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने बड़े-बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।इस कहानी के किरदारों में योग गुरु बाबा रामदेव के करीबियों से लेकर,आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और देश के सबसे बड़े उद्योगपति गौतम अडानी के ग्रुप जैसे बड़े नाम शामिल हैं।पहले समझिए क्या है पूरा मामला?एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,इन सभी बड़े और प्रभावशाली लोगों और संस्थाओं ने राम मंदिर से कुछ ही किलोमीटर दूर,माझा जमथरा नाम के एक गांव में बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदीं। यह खरीद-फरोख्त मंदिर निर्माण के फैसले के बाद हुई।लेकिन कहानी में असली मोड़ अब आता है। यह जमीन कोई मामूली जमीन नहीं थी,बल्किसेना का‘बफर जोन’थी।क्या होता है बफर जोन?बफर जोन का सीधा मतलब है कि यह जमीन सेना के फायरिंगअभ्यास के लिए आरक्षित इलाके के ठीक बगल में थी। इस पर पाबंदी होती है कि आप यहां मकान,फैक्ट्री या कोई बड़ी बिल्डिंग नहीं बना सकते। आप इसके मालिक तो हो सकते हैं,लेकिन इसका इस्तेमाल सिर्फ सीमित कामों (जैसे खेती) के लिए कर सकते हैं,ताकि जब सेना को अभ्यास करना हो,तो इसे आसानी से खाली कराया जा सके। जाहिर है,ऐसी पाबंदियों वाली जमीन की कीमत बहुत कम होती है।<iframe width=”100%” height=”383″ src=”https://www.youtube.com/embed/yY_pwQC-GKg” title=”बड़ा खुलासा | अयोध्या में सेना की जमीन मोदी ने अडानी को दे दी! | Ayodhya | PM Modi | Adani” frameborder=”0″ allow=”accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share” referrerpolicy=”strict-origin-when-cross-origin” allowfullscreen></iframe>अब आता है कहानी में‘चमत्कार’इन बड़े नामों ने जब यह जमीनें खरीदीं,तब तक यह बफर जोन ही था। लेकिन जैसे ही इन लोगों की खरीद-फरोख्त पूरी हुई,उसके कुछ ही महीनों बाद एक‘चमत्कार’हुआ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल ने एक आदेश जारी करके ठीक उसी गांव की जमीन से‘बफर जोन’की पाबंदी को हटा दिया। यानी,अब यह एक सामान्य जमीन बन गई,जहां किसी भी तरह का निर्माण किया जा सकता है।सरकार का क्या कहना है?जब इस बारे में अधिकारियों से पूछा गया,तो उन्होंने कहा कि यह फैसला अयोध्या के विकास के लिए लिया गया है,क्योंकि सरकार वहां मंदिर और संग्रहालय बनाने की योजना बना रही है। उनका यह भी कहना है कि इस फैसले का जमीन खरीदने वाले लोगों या संस्थाओं से कोई लेना-देना नहीं है।लेकिन सवाल तो उठते हैं…इस फैसले की टाइमिंग ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचक और सवाल उठाने वाले लोग पूछ रहे हैं कि:हजारों हेक्टेयर की अधिसूचित जमीन में से सिर्फ उसी894हेक्टेयर जमीन को पाबंदी से मुक्त क्यों किया गया,जिसे कुछ महीने पहले ही प्रभावशाली लोगों ने खरीदा था?क्या इन खरीदारों को पहले से यह पता था कि भविष्य में इस जमीन से पाबंदी हटने वाली है?मामला संयोग का है या कुछ और,यह तो जांच का विषय है,लेकिन इसने अयोध्या की जमीन पर चल रहे बड़े‘खेल’की एक झलक जरूर दिखा दी है। जिस जमीन की कीमत पाबंदियों के कारण कौड़ियों के भाव थी,वह अब एक ही फैसले से सोने के भाव हो गई है।