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नेपाल की तरह इंदौर में भी ‘डिजिटल बगावत’ की साजिश? रैगिंग की जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

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इंदौर का देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) इन दिनों एक अजीब और सनसनीखेज मामले को लेकर सुर्खियों में है। यहां के कुछ सीनियर छात्रों पर आरोप है कि वे विश्वविद्यालय के खिलाफ नेपाल की तरह ही एक बड़ा ‘जेन-जी’ आंदोलन खड़ा करने की साजिश रच रहे थे, और इसके लिए वे अपने जूनियर छात्रों पर दबाव बना रहे थे।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब रैगिंग की एक शिकायत की जांच शुरू हुई।

क्या है यह पूरा मामला?

DAVV के इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट (IET) के कुछ जूनियर छात्रों ने शिकायत की कि उनके पांच सीनियर छात्र उन पर रैगिंग कर रहे हैं और उन्हें धमका रहे हैं। जब विश्वविद्यालय की एंटी-रैगिंग कमेटी ने इस मामले की जांच शुरू की, तो परतें खुलनी शुरू हुईं और एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ।

जांच में पता चला कि ये सीनियर छात्र अपने जूनियर्स पर फर्जी यानी नकली जीमेल (Gmail) और एक्स (X, पूर्व में ट्विटर) अकाउंट बनाने के लिए दबाव डाल रहे थे।

मकसद था नेपाल जैसा ‘Gen-Z’ आंदोलन खड़ा करना

अब सवाल यह उठता है कि इन फर्जी अकाउंट्स का मकसद क्या था? जांच में सामने आया कि इन सीनियर छात्रों का प्लान विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ एक बड़ा ऑनलाइन आंदोलन छेड़ने का था। वे हाल ही में नेपाल में हुए सफल ‘जेन-जी’ आंदोलन से प्रेरित थे।

आपको बता दें कि कुछ समय पहले नेपाल में युवाओं (जेनरेशन Z) ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके अपनी सरकार की नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बहुत बड़ा और सफल आंदोलन खड़ा कर दिया था। यह आंदोलन इतना प्रभावशाली था कि वहां की सरकार तक हिल गई थी।

इंदौर के इन छात्रों की योजना भी कुछ ऐसी ही थी। वे भी सोशल मीडिया पर एक बड़ा कैंपेन चलाकर विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाना चाहते थे।कहा जा रहा है कि शायद विश्वविद्यालय द्वारा की गई कुछ अनुशासनात्मक कार्रवाइयों के जवाब में वे यह कदम उठाने की तैयारी में थे।

रैगिंग के एंगल से जांच हुई तेज

हालांकि, उनका यह प्लान कामयाब हो पाता, उससे पहले ही जूनियर छात्रों की शिकायत ने सब कुछ सामने ला दिया। प्रशासन ने इसे रैगिंग का एक गंभीर मामला माना है। विश्वविद्यालय ने अब इन पांचों सीनियर छात्रों के खिलाफ भंवरकुआं पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा दी है। पुलिस और विश्वविद्यालय, दोनों ही इस बात की जांच कर रहे हैं कि यह मामला सिर्फ रैगिंग तक सीमित था या इसके पीछे कोई और बड़ी साजिश थी।

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