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Smart Meter: स्मार्ट मीटर पर सरकार ने लिया यू-टर्न, जानें आखिरकार क्यों बदला फैसला

स्मार्ट मीटर: राजस्थान में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब राज्य में नए बिजली कनेक्शन के लिए स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य नहीं होगा। बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की ओर से जारी नए आदेश के बाद उपभोक्ताओं को राहत मिली है। डिस्कॉम चेयरपर्सन आरती डोगरा के कार्यालय की ओर से जारी संशोधन में स्पष्ट किया गया है कि अब नए कनेक्शन में पुराने पैटर्न वाले नॉन-स्मार्ट मीटर भी लगाए जा सकेंगे।अब पुराने मीटरों को खराब या क्षतिग्रस्त मीटरों से बदलने की सुविधा होगी। हालाँकि, जहाँ स्मार्ट मीटर पहले से लग चुके हैं या लगाने का काम चल रहा है, वहाँ खराब मीटरों को स्मार्ट मीटर से ही बदला जाएगा।स्मार्ट मीटर की कमी के चलते बदले नियमस्मार्ट मीटर की आपूर्ति में कमी और कर्मचारियों की कमी के चलते यह बड़ा फैसला लिया गया है। लगातार लंबित रह रहे मीटर बदलने के मामलों को ध्यान में रखते हुए यह संशोधन लागू किया गया है। शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 72 घंटे के भीतर मीटर बदलने की अनिवार्यता अभी जारी रहेगी। अगर किसी उपभोक्ता का मीटर दो महीने तक नहीं बदला जाता है तो उसे बिजली बिल में 5 फीसदी की छूट मिलेगी। इस छूट की राशि संबंधित अभियंता को वहन करनी होगी, ताकि लापरवाही पर जवाबदेही तय की जा सके।कांग्रेस बोली- जनता के संघर्ष की जीतपूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरिया ने सरकार के इस फैसले को जनता की जीत बताया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर मामला एक बड़ा घोटाला था और इससे जनता की जेब पर बोझ बढ़ने वाला था। पूरे राजस्थान में लोगों ने इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाई, जिसके चलते भाजपा सरकार को झुकना पड़ा।खाचरियावास ने कहा, “सरकार ने विरोध को दबाने के लिए पुलिस, सरकारी विभाग और कंपनी के निजी गुंडों को तैनात किया था, लेकिन जनता के जन संघर्ष के आगे वे सब बेबस थे। यह जीत सिर्फ़ जनता की है। भाजपा सरकार को इस हार से सबक लेना चाहिए और भविष्य में किसी भी तानाशाही और मनमाने फैसले से बचना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि अगर भविष्य में कहीं भी धोखाधड़ी से स्मार्ट मीटर लगाने की कोशिश की गई, तो जनता एक बार फिर कड़ा विरोध करेगी।संशोधित नियमों का असर यह होगा किनए बिजली कनेक्शन में पुराने मीटर भी लगाए जा सकेंगे। खराब मीटरों की जगह पुराने नॉन-स्मार्ट मीटर लगाने की अनुमति। स्मार्ट मीटर केवल उन्हीं इलाकों में अनिवार्य हैं जहाँ मीटर लग चुके हैं या लगने वाले हैं। अगर दो महीने के अंदर मीटर नहीं बदला जाता है, तो उपभोक्ता को 5% की छूट मिलेगी। राजस्थान में स्मार्ट मीटर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। सरकार के इस फैसले के बाद अब उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।