
जैसे-जैसे दिवाली का त्योहार नजदीक आ रहा है,अंधविश्वास और तांत्रिक क्रियाओं के नाम पर एक बेजुबान पक्षी की बलि चढ़ाने का क्रूर खेल भी तेज हो गया है. जी हां, हम बात कर रहे हैं उल्लुओं की,जिन्हें कई लोग अज्ञानता के कारण दिवाली की रात बलि के लिए अपना निशाना बनाते हैं. इसी खतरे को देखते हुए उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के वन विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गए हैं.उत्तराखंड में हाई अलर्ट,रद्द हुईं छुट्टियांउत्तराखंड के रामनगर,नैनीताल और देहरादून जैसे इलाकों में उल्लुओं की तस्करी और शिकार को रोकने के लिए वन विभाग और कॉर्बेट नेशनल पार्क प्रशासन ने कमर कस ली है.उल्लुओं के शिकार पर24घंटे की सख्त निगरानी रखी जा रही है.वन विभाग के सभी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं.कॉर्बेट प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी को भी उल्लू या किसी अन्य जंगली जानवर के अवैध शिकार की कोई भी जानकारी मिले,तो वे तुरंत वन विभाग को खबर दें.क्यों हमारे लिए इतने जरूरी हैं उल्लू?वन विभाग का कहना है कि यह सिर्फ एक वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन नहीं है,बल्कि हमारे पर्यावरण के लिए भी एक बहुत बड़ा खतरा है. उल्लू प्रकृति के’किसान मित्र’होते हैं. वे चूहों और दूसरे फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जीवों को खाकर उनकी आबादी को नियंत्रित करते हैं,जिससे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहता है.उत्तर प्रदेश के इन इलाकों में है सबसे ज्यादा खतराउत्तराखंड की तरह ही,उत्तर प्रदेश में भी दिवाली के आसपास उल्लुओं के शिकार और तस्करी के मामले बढ़ जाते हैं. यूपी के इटावा के बीहड़ों में उल्लू सबसे ज्यादा पाए जाते हैं और यहीं पर तस्कर सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं. इसके अलावा,कानपुर, मेरठ, रामपुर और पीलीभीत जैसे जिलों में भी बार्न आउल जैसी कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं. अकेले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ क्षेत्र में ही इंडियन ईगल आउल और ब्राउन फिश आउल जैसी दर्जनों प्रजातियां मौजूद हैं,जिन पर अब खतरा मंडरा रहा है.जिसे हम’उल्लू’ समझते हैं,वो है सुपरहीरो!आम बोलचाल की भाषा में भले ही हम किसी को मूर्ख कहने के लिए’उल्लू’शब्द का इस्तेमाल करते हैं,लेकिन असल में यह पक्षी प्रकृति का एक’सुपरहीरो’ है. इसकी खासियतें जानकर आप हैरान रह जाएंगे:तेज सुनने की शक्ति:यह अंधेरे में पत्तों की सरसराहट तक को बहुत दूर से सुन सकता है.बेहतरीन नाइट विजन:इसकी आंखें रात के अंधेरे में भी इंसानों से कई गुना बेहतर देख सकती हैं.साइलेंट किलर:इसके पंखों की बनावट ऐसी होती है कि जब यह उड़ता है,तो बिल्कुल भी आवाज नहीं होती. इसी वजह से यह अपने शिकार को बिना आहट दिए दबोच लेता है.अनोखा रडार सिस्टम:यह अपने शरीर से खास तरह की तरंगें छोड़ता है,जो शिकार से टकराकर जब वापस लौटती हैं, तो उसे अपने शिकार की सटीक लोकेशन का पता चल जाता है.इसलिए, इस दिवाली पर अंधविश्वास में न पड़ें और इस अद्भुत पक्षी को बचाने में मदद करें. यह मूर्ख नहीं,बल्कि प्रकृति का एक अनमोल और बुद्धिमान रक्षक है.
UK News