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बदायूं की बदलने वाली है किस्मत! गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे बसेंगी 200 कंपनियाँ, 50,000 घरों में जलेगा उम्मीद का दीया

New industrial corridor in Badaun : अगर आप बदायूं या उसके आस-पास के इलाक़ों में रहते हैं,तो यह ख़बर आपके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान लाने वाली है। अब तक सिर्फ़ खेती-किसानी,मेंथा और ज़री-ज़रदोज़ी के काम के लिए पहचाने जाने वाले बदायूं में अब तरक्की की एक ऐसी कहानी लिखी जा रही है,जो यहाँ की पूरी तस्वीर बदल कर रख देगी।गंगा एक्सप्रेस-वे जो अब तक सिर्फ़ एक तेज़ रफ़्तार सड़क थी,अब वह बदायूं के लिए तरक्की का रास्ता बनने जा रही है। सरकार ने गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे,बदायूं के दातागंज और बिनावर इलाक़ों में एक बहुत बड़ा औद्योगिक गलियारा (Industrial Corridor)बनाने का काम शुरू कर दिया है।कहाँ बस रहा है यह नया औद्योगिक शहर?यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं है,बल्कि एक विशाल प्रोजेक्ट है। इसके लिए दो जगहों को चुना गया है:बिनावर का घटपुरी इलाक़ा:यहाँ लगभग1600बीघा ज़मीन का इंतज़ाम हो चुका है।दातागंज का पापड़ गाँव:यहाँ भी करीब1000बीघा ज़मीन ले ली गई है।भले ही काम की रफ़्तार अभी थोड़ी धीमी है,लेकिन ज़मीन का इंतज़ाम लगभग पूरा हो चुका है,जो कि सबसे बड़ा काम होता है।40कंपनियाँ अभी से लाइन में, 50,000लोगों को मिलेगा कामइस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फ़ायदा यहाँ के लोगों को रोज़गार के रूप में मिलेगा।200कंपनियों का लक्ष्य:यूपीडा (UPDA)का लक्ष्य है कि इस औद्योगिक गलियारे में छोटी-बड़ी मिलाकर200से ज़्यादा कंपनियाँ अपनी फ़ैक्ट्री लगाएँ।40आवेदन आ चुके हैं:बड़ी-बड़ी कंपनियों ने यहाँ आने में दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी है,और अब तक40कंपनियाँ अपनी फ़ैक्ट्री लगाने के लिए आवेदन भी कर चुकी हैं।50,000नौकरियों की उम्मीद:एक अनुमान के मुताबिक,जब यह गलियारा पूरी तरह से बस जाएगा,तो यहाँ करीब50,000लोगों को सीधे तौर पर रोज़गार मिलेगा। इसका मतलब है कि अब यहाँ के युवाओं को काम के लिए दिल्ली,नोएडा या मुंबई जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।बिनावर के पास बन रहा गंगा एक्सप्रेस-वे का जंक्शन सोने पर सुहागा जैसा काम करेगा,जिससे कंपनियों को अपना माल लाने-ले जाने में बहुत आसानी होगी।रातों-रात4गुना बढ़ गए ज़मीनों के दाम!जैसे ही इस प्रोजेक्ट की घोषणा हुई,यहाँ की ज़मीनों के दाम आसमान छूने लगे। जो ज़मीन पहले2लाख रुपये बीघा में भी कोई नहीं पूछता था,आज उसकी क़ीमत8लाख रुपये प्रति बीघा तक पहुँच गई है। जिन किसानों की ज़मीन इस प्रोजेक्ट में जाने से बच गई है,उनकी तो समझो चाँदी हो गई है। कुछ लोग अपनी बची हुई ज़मीन पर खुद का छोटा-मोटा काम शुरू कर रहे हैं,तो कुछ उसे मुँह-माँगे दामों पर बेच रहे हैं।सबसे पहला हक़,बदायूं वालों का!उद्योग विभाग के अधिकारियों ने यह साफ़ कर दिया है कि इस औद्योगिक गलियारे में फ़ैक्ट्री लगाने के लिए सबसे पहली प्राथमिकता बदायूं ज़िले के ही उद्यमियों (businessmen)को दी जाएगी। जब यहाँ के लोग आवेदन कर लेंगे,उसके बाद ही दूसरे ज़िलों के लोगों को मौक़ा दिया जाएगा। यह क़दम ज़िले के विकास को एक नई रफ़्तार देगा।